मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बिहार कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए. गयाजी के विष्णुपद मंदिर को काशी विश्वनाथ की तर्ज पर विकसित करने के लिए 2500 करोड़ रुपये मंजूर हुए. सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए भी 996 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई.
बिहार सरकार ने गयाजी के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के विकास की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. मंदिर को काशी विश्वनाथ की तर्ज पर विकसित करने के लिए 2500 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इसके साथ दक्षिण बिहार में सोन और फल्गु नदी को जोड़ने की योजना को भी हरी झंडी मिली है. इस परियोजना पर 996 करोड़ रुपये खर्च होंगे. कैबिनेट ने नदियों और जलाशयों से निकलने वाली गाद के इस्तेमाल के लिए बिहार जल स्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति 2026 को भी मंजूरी दी है. इसका इस्तेमाल सड़क, रेलवे, बाढ़ सुरक्षा और भवन निर्माण जैसे कामों में किया जा सकेगा.
बाढ़ को देखते हुए जल संसाधन विभाग को आकस्मिकता निधि से 1000 करोड़ रुपये एडवांस देने की मंजूरी दी गई है. इस पैसे से बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई और जल जीवन हरियाली अभियान के काम होंगे. सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में खाली पदों पर संविदा भर्ती का रास्ता भी साफ हुआ है. बेतिया, पूर्णिया, मधेपुरा, छपरा और समस्तीपुर के मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 366 पद भरे जाएंगे. डेंटल कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, रीडर, लेक्चरर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भी भर्ती होगी.
बिहार की जेलों की खाली जमीन का इस्तेमाल अब पेट्रोल पंप के लिए किया जाएगा. पूर्णिया और मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल की जमीन पर इंडियन ऑयल, जबकि भागलपुर सेंट्रल जेल की जमीन पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम का पेट्रोल पंप खोलने की योजना है. पटना के बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में पैरावेट स्कूल बनाने को भी मंजूरी मिली है, जहां अनुदेशक के 4 और एलडीसी के 2 पद होंगे. कृषि क्षेत्र में मखाना विकास योजना के लिए 89.79 करोड़, ऑयल पाम योजना के लिए 2.10 करोड़ और एकीकृत बागवानी मिशन के लिए अगले दो साल में 78.34 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. ईंट भट्ठों की बकाया राशि के वन टाइम सेटलमेंट समेत कई अन्य प्रस्तावों पर भी मुहर लगी.