नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI पर संभावित शुल्क को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. भारतपे के पूर्व को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर ने सरकार के कदम की आलोचना करते हुए कहा कि शुल्क लगाना एक तरह से टैक्स वसूलने जैसा होगा. सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. हालांकि, इससे ज्यादा रकम के लेनदेन पर शुल्क को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है.
सरकार के नोटिफिकेशन में ₹2,000 तक के UPI भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है. लेकिन ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगेगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं किया गया है. यह भी साफ नहीं है कि ऐसी स्थिति में भुगतान की जिम्मेदारी व्यापारी की होगी या किसी दूसरे पक्ष की. इसी अस्पष्टता ने UPI शुल्क को लेकर बहस को और तेज कर दिया है.
CNN-News18 से बातचीत में अश्नीर ग्रोवर ने कहा कि UPI पर शुल्क लगाया गया तो ग्राहक और व्यापारी फिर नकद लेनदेन की ओर जा सकते हैं. उनका तर्क है कि इससे बैंकों और कारोबारियों के लिए नकदी संभालने का खर्च बढ़ेगा. ग्रोवर के मुताबिक, जो डिजिटल भुगतान व्यवस्था पहले से सुचारू रूप से चल रही है, उसमें शुल्क के जरिए बदलाव करना उचित नहीं है.
ग्रोवर ने ₹2,000 की सीमा को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार के अनुसार ₹2,000 से अधिक के लेनदेन कुल संख्या में केवल 4 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल मूल्य में इनकी हिस्सेदारी 66 प्रतिशत है. उनका आरोप है कि इसी आधार पर एक आसान सीमा तय की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि संभावित शुल्क का भार व्यापारी आगे ग्राहकों पर डाल सकते हैं.
अश्नीर ग्रोवर ने आशंका जताई कि व्यापारी शुल्क से बचने के लिए ग्राहकों को कई छोटे UPI भुगतान करने के लिए कह सकते हैं. इससे भुगतान प्रक्रिया जटिल हो सकती है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार UPI को लेकर किस तरह की सब्सिडी देती है, जिसकी भरपाई के लिए नया शुल्क जरूरी बताया जा रहा है. उनके अनुसार, इस फैसले के पीछे स्पष्ट आर्थिक तर्क होना चाहिए.
ग्रोवर ने UPI की तुलना देश के ATM और नकदी प्रबंधन तंत्र से भी की. उन्होंने कहा कि भारत में ATM और कैश लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को चलाने की सालाना लागत करीब ₹30,500 करोड़ है. इसी संदर्भ में उन्होंने RBI, बैंकों और NPCI की वित्तीय स्थिति का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि आखिर UPI के कारण वास्तविक नुकसान किसे हो रहा है. फिलहाल UPI शुल्क का अंतिम स्वरूप स्पष्ट होना बाकी है.