CM नीतीश कुमार की विधानसभा में फिसली जुबान, वीडियो में देखें कैसे गुस्से में गलती से बोल गए '2002' और फिर
बिहार विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई. चौकीदारों पर लाठीचार्ज और 'बंदूक-गोली की सरकार' के आरोपों पर बिफरे नीतीश ने राजद को पुराने दिनों की याद दिलाई, हालांकि इस दौरान उनकी जुबान फिसलने से सदन में चर्चा छिड़ गई.
पटना: बिहार के राजनीतिक गलियारों में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री और जदयू (JD-U) सुप्रीमो नीतीश कुमार का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सरकार को बंदूकों और गोलियों के दम पर शासन चलाने का आरोप लगाते हुए घेरा, जिस पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्ष को जमकर खरी-खोटी सुनाई.
दरअसल, यह बहस तब शुरू हुई जब राजद (RJD) विधायक कुमार सर्वजीत ने गांव के चौकीदारों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया. सर्वजीत ने आरोप लगाया कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे गृह विभाग के कर्मचारियों के साथ कल बुरा बर्ताव किया गया. विपक्ष के सदस्यों ने वेल में आकर 'बंदूक और गोली की सरकार नहीं चलेगी' के नारे लगाने शुरू कर दिए. विपक्षी शोर-शराबे से तल्ख हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीखा जवाब देते हुए कहा- 'बकवास मत करो. यह सरकार बिना किसी रुकावट के चलेगी.'
'202' या 'दो हज़ार दो'? जुबान फिसलने पर चर्चा
गरमागरम बहस के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जुबान फिसल गई, जो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई. भाजपा नीत एनडीए गठबंधन को मिले भारी जनादेश का जिक्र करते हुए नीतीश कुमार ने गलती से कह दिया, 'जरा हमें देखो, हम दो हजार दो (2002) हैं.' दरअसल, वे 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए की 202 सीटों की संख्या बता रहे थे, लेकिन आवेश में उनके मुंह से 'दो हजार दो' निकल गया. उन्होंने राजद पर तंज कसते हुए कहा कि अब तुममें से कितने लोग बचे हैं, यह देखो.
पुराने शासन और कानून-व्यवस्था पर तीखा पलटवार
सदन में बहस तब और बढ़ गई जब राजद नेता भाई वीरेंद्र ने मुख्यमंत्री को पुराने गठबंधनों की याद दिलाई. इस पर पलटवार करते हुए नीतीश कुमार ने राजद के पिछले शासन की आलोचना की. उन्होंने कहा कि पहले कानून-व्यवस्था इतनी खराब थी कि लोग शाम 5 बजे के बाद घर से बाहर निकलने में डरते थे. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि राजद के लोग हमेशा शरारत करते थे, इसी वजह से वे पीछे हटे थे. अंततः संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी द्वारा चौकीदार प्रतिनिधियों से वार्ता और कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही सदन में शांति बहाल हो सकी.
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