पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी है. लंबे समय से तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षक अब अगले सप्ताह से स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेंगे. शिक्षा विभाग ने तबादला प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है. इसके बाद अब शिक्षकों के स्थानांतरण का रास्ता साफ हो गया है.
शिक्षा विभाग ने राज्य के 5.88 लाख शिक्षकों का रेशनलाइजेशन पूरा कर लिया है. इस प्रक्रिया के तहत बिहार के सभी 76 हजार सरकारी विद्यालयों में स्वीकृत पदों, कार्यरत शिक्षकों की संख्या और विषयवार आवश्यकता का पूरा विवरण तैयार किया गया है. अब इसी आधार पर शिक्षकों का तबादला किया जाएगा, जिससे जरूरत वाले स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जा सकें.
शिक्षा विभाग पहले ही जुलाई महीने में बड़े पैमाने पर शिक्षकों के तबादले की योजना बना चुका है. अब रेशनलाइजेशन पूरा होने के बाद इस योजना को अमल में लाने की तैयारी तेज कर दी गई है. विभाग का मानना है कि इससे स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित होगा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा.
अब तक कई स्कूल ऐसे थे जहां जरूरत से अधिक शिक्षक तैनात थे, जबकि अनेक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई थी. इसके कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी. कई जगह विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी थी, जबकि कुछ स्कूलों में शिक्षकों को पर्याप्त कक्षाएं भी नहीं मिल रही थीं. रेशनलाइजेशन के बाद विभाग के पास प्रत्येक विद्यालय की वास्तविक जरूरत का पूरा आंकड़ा उपलब्ध हो गया है.
जानकारी के अनुसार इसी सप्ताह शिक्षा विभाग का तबादला पोर्टल सक्रिय कर दिया जाएगा. पोर्टल शुरू होने के बाद शिक्षक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकतम दो सप्ताह के भीतर स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने की संभावना है. इससे हजारों शिक्षकों को अपने इच्छित या जरूरत के अनुसार स्थान पर तैनाती मिलने की उम्मीद है.
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के पद और उपलब्धता की पहचान का कार्य पूरा हो चुका है. अब तबादला और नई नियुक्ति की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. उन्होंने कहा कि पोर्टल जल्द ही शुरू होगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी.
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस कदम से न केवल शिक्षकों की तैनाती संतुलित होगी, बल्कि विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा. इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है.