Bihar Elections: जेएनयू के छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम ने मंगलवार को कड़कड़डूमा कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली जिसमें उन्होंने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए अंतरिम जमानत मांगी थी. इमाम की ओर से पेश हुए वकील अहमद इब्राहिम ने अदालत को बताया कि नियमित जमानत याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और अंतरिम जमानत आवेदन के लिए उचित मंच भी शीर्ष अदालत ही होना चाहिए था.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) समीर बाजपेयी ने इब्राहिम को उस आशय का एक आवेदन दायर करने को कहा और कहा कि अनुरोध की अनुमति दी जाएगी. इमाम ने बहादुरगंज विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए 15 से 29 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत मांगी थी. अपनी याचिका में उन्होंने खुद को "राजनीतिक कैदी और छात्र कार्यकर्ता" बताया.
जनवरी 2020 से हिरासत में हैं शरजील इमाम
बिहार के जहानाबाद जिले का निवासी शरजील इमाम जनवरी 2020 से हिरासत में है. उस पर नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से जुड़े कई मामले दर्ज किए गए थे.
जबकि उन्हें उनमें से कुछ मामलों में जमानत मिल गई थी, वह 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में जेल में बंद हैं, जिसमें दिल्ली पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) लगाया है. 2 सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने दंगों की साजिश के मामले में उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी. उस आदेश के खिलाफ उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
चुनाव लड़ने की जताई थी इच्छा
इससे पहले इमाम ने बिहार में अपना नामांकन दाखिल करने और प्रचार करने के लिए 15 से 29 नवंबर तक 14 दिन की अंतरिम जमानत की मांग करते हुए एक याचिका भी दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि वह बहादुरगंज विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना चाहते हैं. इसमें कहा गया है, "चूंकि आवेदक एक राजनीतिक कैदी और एक छात्र कार्यकर्ता है, इसलिए वह अपने गृह राज्य बिहार से चुनाव लड़ने को तैयार है."