पटना: असदुद्दीन ओवैसी ने तेजस्वी यादव पर रविवार को निशाना साधा है. तेजस्वी यादव ने उन्होंने कथित तौर पर उन्हें 'चरमपंथी' कहा था. इसके जवाब में असदुद्दीन ओवैसी ने राजद नेता पर आरोप लगाया कि उन्होंने यह शब्द पाकिस्तान से लिया है और व्यंग्यात्मक लहजे में उनसे पूछा, बाबू चरमपंथी' को तुम जरा अंग्रेजी में लिख ले.?
बिहार के किशनगंज में एक चुनावी रैली में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख ने गरजते हुए कहा कि एक साक्षात्कारकर्ता ने तेजस्वी यादव से पूछा कि उन्होंने ओवैसी के साथ गठबंधन क्यों नहीं किया जब एआईएमआईएम ने 2025 के चुनाव के लिए सीट-शेयर समझौते पर सहमति जताई थी. तेजस्वी ने कहा ओवैसी एक चरमपंथी हैं... एक कट्टरपंथी हैं एक आतंकवादी हैं. वह मुझे 'चरमपंथी' कहते हैं क्योंकि मैं अपने धर्म का गर्व से पालन करता हूं.
ओवैसी ने गुस्से में कहा, "जो आपके सामने नहीं झुकता जो भीख नहीं मांगता जो आपके पिता से नहीं डरता आप उसे कायर कहते हैं? मेरे चेहरे पर दाढ़ी और सिर पर टोपी क्या यह मुझे चरमपंथी बनाता है? आपके अंदर इतनी नफरत है.
#WATCH | Kishanganj, Bihar | AIMIM Chief Asaduddin Owaisi says, "... Today an interviewer asked Tejashwi Yadav why he didn't align with Owaisi. Tejashwi said that Owaisi is an extremist, a fanatic, a terrorist... I ask Tejashwi, 'babu extremist ko tum zara angrezi mein likh ke… pic.twitter.com/vNiIgtm20h
— ANI (@ANI) November 2, 2025
बाद में उनकी पार्टी ने एक्स पर एक ऑडियो क्लिप साझा की, जिसके बारे में कहा गया कि यह यादव के साक्षात्कार और ओवैसी की तीखी प्रतिक्रिया से है, जिसमें एआईएमआईएम नेता ने घोषणा की थी, "तेजस्वी पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं. एआईएमआईएम ने ट्वीट कर कहा, तेजस्वी यादव ने ओवैसी के सिर पर टोपी और चेहरे पर दाढ़ी देखकर उन्हें उग्रवादी कहा; यह सीमांचल के पूरे लोगों का अपमान है.
ओवैसी की एआईएमआईएम और महागठबंधन के बीच सीट बंटवारे पर वार्ता विफल होने के बाद यह घोषणा की गई है. महागठबंधन यादव और उनके राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट है. एआईएमएम कथित तौर पर छह सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता था, लेकिन इस प्रस्ताव को कोई स्वीकार नहीं कर सका. इसके बाद एआईएमआईएम ने बिहार की 243 सीटों में से 100 पर अकेले चुनाव लड़ने की योजना की घोषणा की.
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में 'तीसरा मोर्चा' होगी, जहां वर्षों से मतदाताओं के विकल्प मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड और उसके सहयोगी भारतीय जनता पार्टी या कांग्रेस-राजद साझेदारी तक सीमित रहे हैं.