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बिहार चुनाव में बड़ा उलटफेर, मुस्लिम बहुल सीटों पर NDA की बढ़त, JDU और LJP(RV) को भारी फायदा

बिहार विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में NDA की अप्रत्याशित बढ़त दिख रही. JDU और LJP(RV) को कई सीटों पर लाभ मिला, जबकि महागठबंधन खासकर RJD और कांग्रेस पिछड़ते नजर आए.

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Edited By: Kuldeep Sharma
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Courtesy: @annamalai_k

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के शुरुआती नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा मोड़ ला दिया है. जहां उम्मीद थी कि महागठबंधन बेरोजगारी और नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दों पर मजबूत वापसी करेगा, वहीं शुरुआती रुझानों ने संकेत दिया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी NDA ने अप्रत्याशित बढ़त हासिल कर ली है.

JDU और LJP(RV) को जहां इन इलाकों में अच्छा फायदा मिलता दिख रहा है, वहीं RJD और कांग्रेस पिछड़ती नजर आ रही हैं.

मुस्लिम बहुल सीटों पर NDA की बढ़त

शुक्रवार सुबह आए रुझानों में यह साफ दिखा कि मुस्लिम आबादी वाले कई क्षेत्रों में NDA को बढ़त मिल रही है. शुरुआती गिनती के मुताबिक, कम से कम 16 ऐसी सीटों पर NDA आगे है. इनमें सबसे ज्यादा फायदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी JDU को मिला है, जो 2020 की तुलना में लगभग आठ सीटें अधिक पाने की स्थिति में दिख रही है. यह बदलाव कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चौंकाने वाला है.

LJP(RV) का उभार, छह मुस्लिम बहुल सीटों में बढ़त

चिराग पासवान की पार्टी LJP (RV) ने भी इस बार अप्रत्याशित प्रदर्शन किया है. शुरुआती रुझानों में पार्टी छह ऐसी सीटों पर आगे चल रही है, जहां मुस्लिम वोटरों की संख्या काफी अधिक है. यह संकेत है कि युवा नेतृत्व और स्थानीय मुद्दों के आधार पर पार्टी ने इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाई है. LJP(RV) का यह उभार NDA के कुल प्रदर्शन को और मजबूत करता दिख रहा है.

महागठबंधन का वोट नहीं हुआ कन्वर्ट

रुझानों से यह भी साफ है कि महागठबंधन मुस्लिम वोटों को सीटों में बदलने में असफल रहा. 2020 में RJD ने 18 मुस्लिम बहुल सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार कम से कम सात सीटों पर वह पीछे है. कांग्रेस भी अपने पहले जीते चार क्षेत्रों में पिछड़ रही है. रोजगार और नए चेहरे के वादों पर वोट मांगने के बावजूद नतीजे उनके पक्ष में नहीं जा रहे. इसके उलट NDA ने पूरे राज्य में बढ़त बनाए रखी है.

जन सुराज का असर नहीं

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को लेकर जो उत्सुकता थी, शुरुआती रुझानों में उसका असर दिखाई नहीं दिया. पार्टी न केवल सीटों में पिछड़ रही है, बल्कि जहां उसका वोट शेयर दिख रहा है, वह भी मामूली है. इससे यह स्पष्ट होता है कि त्रिकोणीय मुकाबले की बात सिर्फ चर्चा तक सीमित रही और जन सुराज नतीजों पर कोई खास असर नहीं डाल पाई.

काउंटिंग की कड़ी निगरानी और भारी मतदान

सभी 243 सीटों की मतगणना कड़ी सुरक्षा में हो रही है. 243 रिटर्निंग ऑफिसर्स और उतने ही काउंटिंग ऑब्जर्वर निगरानी कर रहे हैं. 18,000 से अधिक एजेंट मतगणना केंद्रों पर मौजूद हैं. मोबाइल ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. इस बार 7 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने दो चरणों 6 और 11 नवंबर में मतदान किया था. शुरुआती रुझानों में NDA स्पष्ट बढ़त पर है, जबकि महागठबंधन पिछड़ता दिख रहा है.