पटना का 6 साल का आदित्य बना BPSE छात्र आंदोलन का चेहरा, बेबाक जवाबों ने खींचा सबका ध्यान

बिहार की राजधानी पटना में छात्र और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच छह साल का आदित्य कुमार लगातार चर्चा में है. हाथ में तिरंगा और पोस्टर लेकर प्रदर्शन में पहुंचने वाला आदित्य पत्रकारों के सवालों का बेबाकी से जवाब देता है और इसी वजह से वह इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है.

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Shanu Sharma

पटना में पिछले कुछ दिनों से हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच एक छह साल का बच्चा लोगों और मीडिया का ध्यान खींच रहा है. पहली कक्षा में पढ़ने वाला आदित्य कुमार अपनी मां के साथ प्रदर्शनों में पहुंचता है. हाथ में तिरंगा और पोस्टर लेकर वह प्रदर्शनकारियों के बीच नारे लगाता दिखाई देता है.

आदित्य को पहली बार तेजस्वी यादव के लोक भवन मार्च के दौरान देखा गया था. इसके बाद पटना में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान वह लगातार मीडिया कैमरों के सामने नजर आया. उसकी बेबाक बातचीत और आत्मविश्वास के कारण देखते ही देखते वह इंटरनेट पर चर्चा का चेहरा बन गया.

बीपीएससी विवाद के बीच फिर चर्चा में आया आदित्य

बीपीएससी टीआरई-4 को लेकर चल रहे विवाद के बीच 25 अगस्त को हुए छात्रों के प्रदर्शन में भी आदित्य मौजूद था. इस दौरान वह बस की छत पर चढ़कर नारे लगाता दिखाई दिया. कार्रवाई के दौरान पुलिस अभ्यर्थियों के साथ आदित्य और उसकी मां को भी वाहन में बैठाकर ले गई थी. बाद में दोनों को छोड़ दिया गया. आदित्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अभ्यर्थियों की मांग है कि परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ी का जवाब दिया जाए और जरूरत पड़ने पर दोबारा परीक्षा कराई जाए. उसने यह भी कहा कि वह अभी छोटा है, लेकिन बड़ा होकर पढ़ेगा और अपने भविष्य को लेकर सवाल जरूर पूछेगा.


पुलिस और सरकार पर भी साधा निशाना

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए आदित्य ने कहा कि वह पुलिस की कार्रवाई से डरने वाला नहीं है. उसने प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ भी तीखे बयान दिए. पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए उसने पूछा कि क्या पुलिस को लोगों पर लाठी चलाने का आदेश मिला है.

आदित्य ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अभ्यर्थियों के लिए नौकरी की मांग करने के साथ शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे की भी अपील की. हालांकि, उसकी उम्र महज छह साल है, लेकिन आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर उसके आत्मविश्वास से दिए गए जवाबों ने वहां मौजूद पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों का ध्यान खींचा.