नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट जगत में जहीर खान का नाम काफी लोकप्रिय है. जहीर खान ऐसे गेंदबाजों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी गेंदबाजी से एक जबददस्त छाप छोड़ी है. इन्होंने अपनी स्विंग, सटीक लाइन-लेंथ और मुश्किल समय में विकेट लेने की क्षमता से भारतीय टीम को कई अहम मुकाबले जिताने में मदद की. आज जहीर खान का 48वां जन्मदिन है.
उनका क्रिकेट करियर जितना शानदार है, उतना ही दिलचस्प वो कहानी है, जिसने उन्हें क्रिकेट तक पहुंचने में मदद की. चलिए जानते हैं कि जहीर खान के क्रिकेट जगत में तेज गेंदबाज बनने की कहानी.
जहीर खान महाराष्ट्र के श्रीरामपुर से आते हैं. इन्होंने 12वीं के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था. परिवार के लिए यह एक सिक्योर ऑप्शन था. लेकिन जहीर शुरू से ही क्रिकेट खेलना चाहते थे. उनके पिता बख्तियार खान ने बेटे की प्रतिभा को पहचाना. फिर उन्हें क्रिकेट में आगे बढ़ने का मौका दिया.
करीब 17 साल की उम्र में जहीर अपने पिता के साथ मुंबई गए. वहां उन्होंने एमआरएफ पेस फाउंडेशन के ट्रायल में हिस्सा लिया. यहां पर कोच टीए सेकर और डेनिस लिली ने जहीर को देखा. इसके बाद उन्होंने मुंबई के क्लब क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई. फिर वो डॉमेस्टिक क्रिकेट से होते हुए भारतीय टीम तक पहुंचे.
जहीर खान ने साल 2000 में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया. उन्होंने 25 अक्टूबर 2000 को केन्या के खिलाफ नैरोबी में अपना पहला वनडे खेला. जहीर की सबसे बड़ी ताक बॉल को दोनों तरफ स्विंग करने की क्षमता थी. बाएं हाथ से गेंदबाजी करने के चलते उनका एंगल बल्लेबाजों के लिए चुनौती पैदा करता था. उनकी सटीक लाइन-लेंथ और गेंद को आखिरी समय तक स्विंग कराने की क्षमता ने उन्हें खास गेंदबाज बनाया.
हर किसी का समय कभी न कभी थोड़ा मुश्किल भरा आता ही है. जहीर के करियर में एक समय आया. इस समय उनकी परफॉर्मेंस उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. 2004-05 के आसपास उन्हें भारतीय टीम से बाहर होना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने इस दौरान अपनी गेंदबाजी पर काफी काम किया और एक नया वेरिएशन डेवलप किया.
जहीर खान के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2011 वनडे वर्ल्ड कप सबसे खास है. भारत ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में घरेलू मैदान पर विश्व कप जीता था. उन्होंने टूर्नामेंट में 9 मैच खेले और 21 विकेट लिए. वह पाकिस्तान के शाहिद अफरीदी के साथ टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे.
2011 से पहले जहीर ने 2002-03 चैंपियंस ट्रॉफी में भी शानदार प्रदर्शन किया था. उन्होंने टूर्नामेंट में 5 मैचों में 8 विकेट लिए और भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे. इस टूर्नामेंट में भारत और श्रीलंका संयुक्त विजेता बने थे. जहीर की गेंदबाजी ने भारतीय टीम के अभियान में अहम भूमिका निभाई थी.
जहीर को भले ही तेज गेंदबाजी के लिए जाना जाता है, लेकिन उन्होंने बल्ले से भी कुछ यादगार प्रदर्शन किए. 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट मैच में उन्होंने 115 गेंदों पर 75 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने सचिन तेंदुलकर के साथ 133 रन की साझेदारी की. यह भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट में 10वें विकेट के लिए लंबे समय तक याद रखी जाने वाली साझेदारियों में शामिल रही.