स्विट्जरलैंड ने रचा इतिहास, अल्जीरिया को हराकर 88 साल बाद विश्व कप नॉकआउट में दर्ज की जीत
स्विट्जरलैंड ने फीफा विश्व कप 2026 के नॉकआउट मुकाबले में अल्जीरिया को 2-0 से हराकर इतिहास रच दिया. इस जीत के साथ टीम 1938 के बाद पहली बार नॉकआउट स्टेज से आगे बढ़ी.
फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में स्विट्जरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अल्जीरिया को 2-0 से मात दी. इस यादगार जीत के साथ स्विस टीम ने 88 साल पुराना इंतजार खत्म किया और पहली बार आधुनिक दौर में विश्व कप नॉकआउट मुकाबला जीतकर अगले स्टेज में जगह बनाई. ब्रेल एम्बोलो और डैन न्दोये के गोलों ने टीम की जीत की नींव रखी, जबकि कप्तान ग्रैनिट जाका और युवा मंजाम्बी ने भी अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा.
ऐतिहासिक जीत से अगले दौर में किया प्रवेश
स्विट्जरलैंड ने मुकाबले की शुरुआत से ही संयम बनाए रखा और 2-0 की जीत के साथ अंतिम 16 में अपनी जगह पक्की कर ली. टीम अब अगले दौर में कोलंबिया और घाना के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से भिड़ेगी. यह विश्व कप इतिहास में स्विट्जरलैंड की लगातार तीसरी जीत भी रही.
एम्बोलो और न्दोये ने दिलाई बढ़त
अल्जीरिया ने शुरुआती मिनटों में मौका बनाया, लेकिन बढ़त नहीं ले सका. इसके बाद स्विट्जरलैंड ने पहला प्रभावी हमला किया और ब्रेल एम्बोलो ने गोल कर टीम को आगे कर दिया. दूसरे हाफ की शुरुआत में डैन न्दोये ने शानदार फिनिश के साथ दूसरा गोल दागकर मुकाबले पर स्विट्जरलैंड की पकड़ मजबूत कर दी.
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अल्जीरिया की कोशिशें रहीं नाकाम
दो गोल से पिछड़ने के बाद अल्जीरिया ने वापसी की कोशिश की, लेकिन स्विस रक्षा पंक्ति ने कोई गलती नहीं की और गोलकीपर और डिफेंडरों ने कई अहम मौकों पर खतरा टाल दिया. दूसरी ओर स्विट्जरलैंड को तीसरा गोल करने के अवसर भी मिले, लेकिन टीम उन्हें गोल में बदल नहीं सकी.
मंजाम्बी और जाका रहे आकर्षण का केंद्र
युवा खिलाड़ी मंज़ाम्बी ने आक्रमण में बेहतरीन भूमिका निभाई और एम्बोलो के गोल की नींव रखी. टूर्नामेंट में उनके योगदान ने उन्हें सबसे प्रभावशाली युवा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है. कप्तान ग्रैनिट ज़ाका ने भी अपना 150वां अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेलते हुए मिडफील्ड में शानदार नियंत्रण बनाए रखा.
विश्व कप में दर्ज हुआ नया अध्याय
यह जीत स्विट्जरलैंड के लिए केवल अगले दौर में पहुंचने तक सीमित नहीं रही, बल्कि टीम के विश्व कप इतिहास का नया अध्याय भी बन गई. 1938 के बाद पहली बार नॉकआउट मुकाबला जीतने वाली स्विस टीम ने साबित कर दिया कि वह इस बार खिताब की दौड़ में मजबूत दावेदार बनकर उभरी है.