जब दादा के खिलाफ रची थी साजिश... गांगुली के कप्तानी छोड़ने तक की आ गई थी नौबत, भज्जी-युवराज की शरारत में द्रविड़ भी बने साथी
हरभजन सिंह ने सौरव गांगुली की कप्तानी के दौर का मजेदार किस्सा सुनाया, जब युवराज और भज्जी ने फर्जी अखबार की कटिंग बनाकर दादा को अप्रैल फूल बनाया और राहुल द्रविड़ भी इस शरारत में शामिल हुए
भारतीय क्रिकेट में सौरव गांगुली की कप्तानी का दौर मैदान की जीत के साथ शानदार ड्रेसिंग रूम के लिए भी याद किया जाता है. कहा जाता है कि सौरव गांगुली ने अपनी कप्तानी में भारत की टीम शानदार टीम तैयार की थी. दादा की कप्तानी में गेंदबाज हरभजन सिंह को अलग पहचान मिली.
अब भज्जी ने इसी दौर का एक मजेदार किस्सा साझा किया है. उन्होंने बताया कि युवराज सिंह और उन्होंने मिलकर गांगुली को अप्रैल फूल बनाने की योजना बनाई थी. फर्जी अखबार की कटिंग और सीनियर खिलाड़ियों की गंभीर भूमिका ने मजाक को इतना असली बना दिया कि गांगुली कुछ समय के लिए पूरी तरह उलझ गए.
फर्जी खबर से शुरू हुआ पूरा खेल
हरभजन के मुताबिक, उन्होंने युवराज के साथ मिलकर गांगुली के नाम से जुड़ी एक झूठी खबर तैयार की. युवराज ने उस कथित बयान को लेकर गांगुली से सवाल शुरू किए. हरभजन ने भी गंभीर चेहरा बनाकर उन्हें घेर लिया. राहुल द्रविड़ को भी इस साजिश में शामिल कर लिया गया. दोनों सीनियर खिलाड़ियों को गंभीर देखकर गांगुली को समझ नहीं आया कि आखिर मामला क्या है.
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गांगुली ने कही कप्तानी छोड़ने की बात
मजाक इतना आगे बढ़ गया कि गांगुली ने सफाई देते हुए यहां तक कह दिया कि अगर उन्होंने ऐसा बयान दिया है तो वह कप्तानी छोड़ देंगे. वह बार-बार पूछ रहे थे कि उन्होंने यह बात कब और कहां कही. टीम के खिलाड़ी भी अपना सामान समेटने और जाने की तैयारी करने का नाटक करते रहे. आखिरकार जब सच्चाई सामने आई तो गांगुली को पता चला कि उनके साथ पूरा मजाक किया गया था.
राज खुलते ही दादा ने दौड़ाया
हरभजन ने बताया कि साजिश का खुलासा होते ही गांगुली खिलाड़ियों के पीछे दौड़ पड़े. हालांकि, उनका गुस्सा ज्यादा देर नहीं रहा. हरभजन के अनुसार, यह घटना गांगुली के स्वभाव को दिखाती है. वह खिलाड़ियों के लिए कप्तान से कहीं ज्यादा बड़े भाई जैसे थे. इसी सहज रिश्ते की वजह से टीम के युवा खिलाड़ी उनके साथ खुलकर मजाक भी कर पाते थे
ड्रेसिंग रूम को परिवार जैसा मानते थे
हरभजन ने कहा कि गांगुली के दौर में टीम का ड्रेसिंग रूम परिवार जैसा था. सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण और जवागल श्रीनाथ जैसे सीनियर खिलाड़ियों ने युवाओं का साथ दिया. इस शरारत से तत्कालीन कोच जॉन राइट भी अनजान थे और करीब 15-20 मिनट तक खिलाड़ियों का इंतजार करते रहे. हरभजन का मानना है कि ड्रेसिंग रूम में मस्ती और आपसी जुड़ाव खिलाड़ियों को मैदान पर बेहतर प्रदर्शन में मदद करता है