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Independence Day Special: वो खिलाड़ी जो आजादी के बाद बना था भारत-पाकिस्तान के लिए 'बीच का बिच्चू', जानें अनोखा किस्सा

नई दिल्ली: गली क्रिकेट खेलने वालों के लिए एक टर्म बड़ा मशहूर है जो कि आम बोल-चाल की भाषा में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, कुछ जगह इसे 'बीच का बिच्चू या बिच्छू' कहते हैं तो कुछ जगह 'बिचवनिया', कुछ लोग 'दूध-भात' के नाम से पुकारते हैं तो कुछ लोग इसे दुग्गी रूल के नाम से भी जानते हैं.

Vineet Kumar
Edited By: Vineet Kumar
Independence Day Special: वो खिलाड़ी जो आजादी के बाद बना था भारत-पाकिस्तान के लिए 'बीच का बिच्चू', जानें अनोखा किस्सा

नई दिल्ली: गली क्रिकेट खेलने वालों के लिए एक टर्म बड़ा मशहूर है जो कि आम बोल-चाल की भाषा में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, कुछ जगह इसे 'बीच का बिच्चू या बिच्छू' कहते हैं तो कुछ जगह 'बिचवनिया', कुछ लोग 'दूध-भात' के नाम से पुकारते हैं तो कुछ लोग इसे दुग्गी रूल के नाम से भी जानते हैं. भारत में इतनी भाषा और बोलियां हैं जिसके चलते इसे अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है लेकिन इसके नियम एक ही होते हैं.

दो देशों से खेल चुके हैं ये खिलाड़ी

इस नियम के तहत जब भी गली क्रिकेट में खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या विषम होती है तो एक खिलाड़ी को दोनों टीमों से खिलाया जाता है जिसे दोनों तरफ से फील्डिंग, गेंदबाजी और बल्लेबाजी करने का अधिकार होता है. पर क्या आपको भारतीय टीम के उस खिलाड़ी का पता है जो भारत और पाकिस्तान दोनों टीमों से एक-दूसरे के खिलाफ खेल चुका है और जिसे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में इन दोनों टीमों के लिए खेलने वाले 'बीच का बिच्चू' खिलाड़ी कहा जा सकता है.

भारत ने 1932 में अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेला था लेकिन देश को आजादी 1947 में मिली थी, ऐसे में स्वाभाविक है कि कई खिलाड़ी जो आजादी से पहले संयुक्त भारत के लिए खेले थे वो आजादी के बाद पाकिस्तान में बसने पर वहां के लिए खेलने लगे थे. इसमें आमिर इलाही और अब्दुल हाफिज करदार का नाम शामिल है.

भारत से खेलने के बाद भारत के खिलाफ खेले मैच

आमिर इलाही ने भारत के लिए 1947 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेला था तो वहीं पर पाकिस्तान के लिए 1952 में भारत के खिलाफ 5 टेस्ट मैच खेले थे. अब्दुल हाफिज करदार की बात करें तो उन्होंने 1946 में भारत के खिलाफ 3 टेस्ट मैच खेले तो वहीं 1948 से 1958 के बीच पाकिस्तान के लिए 23 टेस्ट मैच खेले. हालांकि हम उन प्लेयर्स की बात नहीं कर रहे जिन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए मैच खेला था बल्कि हम उस खिलाड़ी की बात कर रहे हैं जिसने भारत की ओर से पहले पाकिस्तान की टीम को हराने का काम किया और फिर बाद में पाकिस्तान की टीम से भारत के खिलाफ भी मैच खेला.

भारत से खेल कर पाकिस्तान को हराया और फिर पाकिस्तान से भी खेला क्रिकेट

हम बात कर रहे हैं तेज गेंदबाज गुल मोहम्मद की जिन्होंने 1955 तक भारतीय टीम की ओर से क्रिकेट खेला. गुल मोहम्मद उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने पाकिस्तान के साथ पहली बार खेले गये अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच में खेले और 2-1 से सीरीज जीतने वाली टीम का हिस्सा बनें. हालांकि 1956 में वो पाकिस्तान चले गये और वहां भी पाकिस्तान क्रिकेट टीम से एक अंतर्राष्ट्रीय मैच खेला. गुल मोहम्मद की बात करें तो वो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भले वो करिश्मा नहीं कर सके लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अच्छा नाम कमाया था.

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में मचाया था धमाल

गुल मोहम्मद ने 118 फर्स्ट क्लास मैच खेले जिसमें 12 शतक और 21 अर्धशतक के दम पर 5614 रन बनाए तो वहीं पर गेंदबाजी में भी 3 बार 5 विकेट हॉल के दम पर 106 विकेट अपने नाम किये. गुलाम भारत के लाहौर में आंखे खोलने वाले गुल मोहम्मद ने अपनी आखिरी सांसे बंट चुके पाकिस्तान के लाहौर में ली और 8 मई 1992 को दुनिया छोड़ दी.

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