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Independence Day Special: जब आजादी के बाद पहली बार भारत से पाकिस्तान की हुई थी भिड़ंत, जानें कब, कहां और किन प्लेयर्स के बीच हुआ मैच

नई दिल्ली: आजादी के महापर्व पर हम कुछ ऐसे किस्सों को याद कर रहे हैं जो कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार देखने को मिले थे. देश का राष्ट्रीय खेल भले ही हॉकी को माना जाता हो लेकिन जितना जुनून क्रिकेट को लेकर देखने को मिलता है वो शायद ही किसी और खेल के प्रति नजर आता हो.

Vineet Kumar
Edited By: Vineet Kumar
Independence Day Special: जब आजादी के बाद पहली बार भारत से पाकिस्तान की हुई थी भिड़ंत, जानें कब, कहां और किन प्लेयर्स के बीच हुआ मैच

नई दिल्ली: आजादी के महापर्व पर हम कुछ ऐसे किस्सों को याद कर रहे हैं जो कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार देखने को मिले थे. देश का राष्ट्रीय खेल भले ही हॉकी को माना जाता हो लेकिन जितना जुनून क्रिकेट को लेकर देखने को मिलता है वो शायद ही किसी और खेल के प्रति नजर आता हो. क्रिकेट के खेल में भी फैन्स को एक राइवलरी का बेसब्री से इंतजार होता है जिसे देखने के लिए लोग महीनों पहले से तैयारी करना शुरू कर देते हैं.

आजादी के बाद भारत-पाक के बीच खेला गया पहला महामुकाबला

हम बात कर रहे हैं भारत बनाम पाकिस्तान के महामुकाबले की जिसे क्रिकेट की दुनिया की सबसे बड़ी राइवलरी भी माना जाता है. इस राइवलरी का असर इतना बड़ा है कि आईसीसी हर बार अपने टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान की टीम को एक ही ब्रैकेट में रखती है ताकि ये मुकाबला देखा जा सके और इससे होने वाली कमाई में कटौती न हो. पर क्या आप जानते हैं कि इस राइवलरी की शुरुआत कब हुई और दोनों देशों के बीच पहला क्रिकेट मैच कब और कहां खेला गया था.

आज हम आपको आजादी के बाद भारत और पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के बीच खेले गये पहले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच की दास्तां सुनाने जा रहे हैं कि कब, कहां और किन खिलाड़ियों के बीच दुनिया की सबसे बड़ी राइवलरी की शुरुआत हुई थी.

जेसी मुखर्जी ने दिया था भारत-पाक मैच कराने का प्रस्ताव

बात 1952 की है जब देश में संविधान बन चुका था और लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना हो गई थी. 1947 की आजादी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष से बने जख्म धीरे-धीरे भरने शुरू हुए थे और दोनों देश की सरकारें एक-दूसरे से दोस्ताना रिश्ते बढ़ाने की ओर प्रयास करना शुरू कर रही थी. हालांकि इन सब के बीच लोगों के बीच की वो कड़वाहट कम करने का कोई तरीका नहीं समझ आ रहा था.

आजादी के बाद बीसीसीआई की कमान संभालने वाले पहले भारतीय और तत्कालीन अध्यक्ष जेसी मुखर्जी (जनेंद्र नाथ मुखर्जी) ने उस समय भारत और पाकिस्तान टीम के बीच अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच कराने का सुझाव दिया. इंग्लैंड की टीम पहले ही भारत का दौरा कर के जा चुकी थी जिसमें 5 टेस्ट मैच खेले गये और भारतीय टीम 1-1 से सीरीज को ड्रॉ करने में कामयाब रही थी. भारतीय टीम को आजादी के बाद अपनी पहली क्रिकेट मैच की जीत हासिल हो चुकी थी और अब इस कहानी में एक नया अध्याय लिखा जाना था. इसी को लेकर जब जेसी मुखर्जी ने भारत और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच कराने का प्रस्ताव दिया तो इसे हाथों हाथ मंजूरी मिल गई.

जानें कब और किन खिलाड़ियों के बीच खेला गया था मुकाबला

दोनों टीमों के बीच खेले जाने वाले इस मैच की मेजबानी दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम को दी गई और मैच की तारीख तय की गई 16 से 21 अक्टूबर लेकिन यह मैच 18 अक्टूबर को ही खत्म हो गया. पाकिस्तान की ओर से अब्दुल करदार की कप्तानी में टीम चुनी गई जिसमें पाकिस्तान के 9 खिलाड़ियों ने अपना डेब्यू किया. एक ही मैच में सबसे ज्यादा खिलाड़ियों के डेब्यू करने का रिकॉर्ड भी इसी मैच के नाम है. भारत ने भी अपनी टीम की कमान लाला अमरनाथ  को सौंपी जिसमें वीनू मांकड़, पंकज रॉय, विजय हजारे, विजय मांजरेकर, पॉली उमरीगर, गुल मोहम्मद, हेमू अधिकारी, गुलाबराय रामचंद, खोखन सेन और गुलाम अहमद कौ शामिल किया.

बल्लेबाजी में टॉप ऑर्डर खिलाड़ियों ने किया निराश

गुरुवार 16 अक्टूबर की सुबह दिल्ली की धूप में टॉस उछाला गया जहां पर लाला अमरनाथ ने जीत हासिल करते हुए पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. हालांकि उनके इस फैसले का साथ भारतीय बल्लेबाजों ने नहीं दिया और एक के बाद एक वापस पवेलियन लौटते नजर आए. हाल ये था कि भारतीय टीम के आधे बल्लेबाज महज 110 रन के स्कोर पर वापस पवेलियन लौट गये थे. पाकिस्तान के लिए खान महमूद और आमिर इलाही की गेंदबाजी जोड़ी कहर बरपा रही थी और ऐसा लग रहा था कि मानों 150 रन के अंदर ही भारतीय बल्लेबाज वापस लौट जाएंगे.

पुछल्ले बल्लेबाजों के दम पर खड़ा किया 372 रन का स्कोर

फैन्स में निराशा थी लेकिन इसे आशा में बदलने का काम विजय हजारे ने किया जिन्होंने गुल मोहम्मद के साथ छठे विकेट के लिए न सिर्फ 70 रन की साझेदारी की बल्कि खुद का अर्धशतक भी पूरा किया. विजय हजारे 76 रन बनाकर खेल रहे थे जब आमिर इलाही ने उनका विकेट लेकर उन्हें वापस पवेलियन भेज दिया. पुछल्ले बल्लेबाजों ने भारतीय टीम की कमान संभाली और जहां टीम 150 रन पर सिमटती नजर आ रही थी वहां पर हेमू अधिकारी (81*) और गुलाम अहमद (50) की अर्धशतकीय पारियों के दम पर टीम ने 372 रन का स्कोर खड़ा कर दिया.

वीनू मांकड़ की आंधी में उड़ी पाकिस्तानी बल्लेबाजी

भारतीय बल्लेबाजी दूसरे दिन के लंच तक ऑल आउट हो चुकी थी और अब गेंदबाजी की बारी थी. पाकिस्तान की ओर से बल्लेबाजी के लिए नजर मोहम्मद और हनीफ मोहम्मद मैदान पर उतरे लेकिन वीनू मांकड़ (8 विकेट) ने अपनी गेंदबाजी के दम पर पाकिस्तानी बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी. वीनू मांकड़ ने पहली पारी में 8 विकेट झटके, जबकि गुलाम अहमद के खाते में एक विकेट आया. भारतीय गेंदबाजी के सामने पाकिस्तानी बल्लेबाज 150 रन ही जोड़ सके और फॉलो ऑन बचा पाने में नाकाम हो गए.

फॉलो ऑन में हारी पाकिस्तान टीम

फॉलो ऑन होने की वजह से पाकिस्तान की टीम को लगातार दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने को मजबूर होना पड़ा. दूसरी पारी में भी भारतीय टीम के लिए एक बार फिर से वीनू मांकड़ (5 विकेट) और गुलाम अहमद (4 विकेट) की जोड़ी ने कमाल दिखाया और अपनी गेंदबाजी की आंधी में पाकिस्तानी बल्लेबाजों को उड़ा दिया. पाकिस्तान के लिए सिर्फ कप्तान अब्दुल करदार (43), इम्तियाज अहमद (43) और फजल महमूद (27) ही दहांई का आंकड़ा पार कर सके और पूरी टीम महज 152 रन के स्कोर पर सिमट गई.

भारत ने 2-1 से जीती सीरीज

भारतीय गेंदबाजों के दम पर मैच सिर्फ 4 दिन में खत्म हो गया और भारतीय टीम ने 70 रन और एक पारी की विशाल जीत हासिल की. आपको बता दें कि यह टेस्ट सीरीज 5 मैचों की थी जिसके दूसरे मैच में पाकिस्तान की टीम ने 43 रन और एक पारी से जीत हासिल कर हिसाब बराबर कर लिया. भारत ने तीसरे मैच में 10 विकेट से जीत हासिल कर एक बार फिर से बढ़त बनाई और आखिरी के दो मैच ड्रॉ होने की वजह से सीरीज पर भी 2-1 से कब्जा किया.

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