FIFA World Cup 2026

मेसी-रोनाल्डो का 'लास्ट डांस', FIFA WORLD CUP 2026 में दिखेगा फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी जंग का अंतिम चैप्टर

लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो FIFA WORLD CUP 2026 में अपने आखिरी सफर के लिए तैयार हैं. फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा टकराव अब आखिरी बार इस स्टेज पर दिखने जा रहा है.

india daily
Ashutosh Rai

फुटबॉल की दुनिया ने पेले और माराडोना जैसे कई महान जादूगर देखे हैं. इसके बाद फुटबॉल के जगत में दो नए नामों ने अपना घर बसाया. एक था अर्जेंटीना का वो खिलाड़ी जिसने छोटी सी उम्र से ही सबके दिलों पर राज कर लिया. दूसरा था पुर्तगाल का वो खिलाड़ी जिसके गोल्स और माइंडसेट ने फुटबॉल को बदल दिया. ये दोनों खिलाड़ी जब भी एक दूसरे के सामने आए तो इतिहास अपने आप बनता चला गया. एक बार फिर और शायद आखिरी बार फुटबॉल के दो दिग्गज वर्ल्ड कप के स्टेज पर अपना 'लास्ट डांस' करते दिखेंगे.

MESSI X

लियोनेल मेसी: पिच पर जादू करने वाला कुदरती जीनियस

फुटबॉल के मैदान पर अपनी जादुई ड्रिबलिंग से दुनिया भर के डिफेंडर्स के तोते उड़ाने वाले लियोनेल मेसी की कहानी सीधे तौर पर गॉड-गिफ्टेड टैलेंट और किस्मत से जंग की मिसाल है. अर्जेंटीना के रोसारियो शहर के एक बेहद साधारण परिवार में जन्मे इस छोटे कद के लड़के के पैरों में बचपन से ही फुटबॉल का ऐसा जादू था कि विरोधी टीमें पानी मांगने लगती थीं. महज 11 साल की उम्र में मेसी को 'ग्रोथ हार्मोन डेफिशिएंसी' (कम लंबाई की बीमारी) नाम का बड़ा झटका लगा. महंगे इलाज का खर्च उठाना उनके माता-पिता के बस के बाहर था. मगर जब हुनर का डंका बजता है, तो सरहदें भी छोटी पड़ जाती हैं. स्पेनिश क्लब FC BARCELONA के स्पोर्ट्स डायरेक्टर मेसी के खेल के इस कदर दीवाने हुए कि उन्होंने बिना वक्त गंवाए एक मामूली टिशू पेपर (नैपकिन) पर ही उनका पहला कॉन्ट्रैक्ट साइन कर डाला और इलाज की पूरी जिम्मेदारी ली. इसके बाद बार्सिलोना की मशहूर 'ला मासिया' एकेडमी से ट्रेनिंग लेकर निकले इस खिलाड़ी ने मैदान पर वो तबाही मचाई कि आज उनके नाम रिकॉर्ड 8 बैलन डी'ओर और एक चमचमाता वर्ल्ड कप है.

CRISTIANO RONALDO Pinterest

क्रिस्टियानो रोनाल्डो: जिम में पसीना बहाकर बना दुनिया का सबसे खतरनाक 'गोलिंग मशीन'

दूसरी तरफ, अपनी फौलादी बॉडी, बिजली जैसी रफ्तार और मैदान पर गदर मचाने वाले क्रिस्टियानो रोनाल्डो की कहानी अटूट अनुशासन और कभी न हार मानने वाले जिद्दी एटीट्यूड का दूसरा नाम है. पुर्तगाल के एक छोटे से टापू मदीरा में भयंकर अभावों और गरीबी के बीच बड़े हुए रोनाल्डो के पिता एक लोकल क्लब में किट-मैन का काम करते थे. रोनाल्डो के पास शायद मेसी जैसी कुदरती जादुई कला नहीं थी लेकिन उन्होंने दिन-रात जिम में खून-पसीना बहाकर खुद को फुटबॉल इतिहास का सबसे परफेक्ट और खतरनाक एथलीट बना दिया. महज 15 साल की उम्र में जब उन्हें 'रेसिंग हार्ट' (दिल की धड़कनें असामान्य रूप से तेज होना) जैसी गंभीर बीमारी का पता चला, तो उन्होंने हार मानने के बजाय तुरंत हार्ट सर्जरी कराई और अगले ही हफ्ते फिर से मैदान पर दौड़ने लगे. स्पोर्टिंग सीपी से शुरू होकर मैनचेस्टर यूनाइटेड और रियल मैड्रिड के शाही मंच तक पहुंचे इस खिलाड़ी ने पावर और स्पीड का ऐसा जानलेवा कॉम्बिनेशन दिखाया कि आज उनके नाम इंटरनेशनल फुटबॉल में सबसे ज्यादा मैच और सबसे ज्यादा गोल ठोकने का ऑल-टाइम वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है.

दो महानायकों की जादुई कहानी और नंबर्स की जंग

एक समय की बात है जब फुटबॉल की मखमली हरी घास पर दो राजकुमारों ने कदम रखा. एक ने अपनी जादुई ड्रिबलिंग से दुनिया को मंत्रमुग्ध किया, तो दूसरे ने अपनी बेजोड़ ताकत और अटूट मेहनत से नामुमकिन को मुमकिन बनाया. पिछले बीस सालों में मेसी ने आठ बैलन डी'ओर और एक कैलेंडर वर्ष में 91 गोल दागे, तो रोनाल्डो ने पांच बैलन डी'ओर जीतकर पांच अलग-अलग वर्ल्ड कप में गोल करने का अनोखा रिकॉर्ड बनाया. इनके बीच खेले गए 36 मुकाबलों में मेसी ने 16 और रोनाल्डो ने 11 मैच जीते, जबकि दोनों के गोल के बीच सिर्फ एक नंबर (22 बनाम 21) का फासला रहा. यह फुटबॉल की वो अमर गाथा है जो खेल के इतिहास को हमेशा परिभाषित करेगी.