पाकिस्तान की इस बला की खूबसूरत क्रिकेटर ने लिया संन्यास, अब मैच रेफरी के रूप में शुरू की नई पारी

पाकिस्तानी तेज गेंदबाज कायनात इम्तियाज ने 13 साल के इंटरनेशनल करियर के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया है. वह अब खेल से जुड़ी रहकर मैच रेफरी की नई भूमिका निभाएंगी.

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Sagar Bhardwaj

पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज कायनात इम्तियाज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है. दाएं हाथ की इस स्टार बॉलर ने पूरे 13 सालों तक पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेला. अपने इस लंबे सफर में उन्होंने 19 वनडे (ODI) और 21 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले.

वनडे मैचों में कायनात ने 10 विकेट चटकाए और 134 रन बनाए, वहीं टी20 में उनके नाम 8 विकेट और 137 रन दर्ज हैं. मैदान पर अपनी तेज गेंदबाजी के साथ-साथ कायनात अपने ग्लैमरस लुक और सादगी के लिए भी फैंस के बीच काफी लोकप्रिय रही हैं. निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने मार्च 2022 में बिजनेसमैन मोहम्मद वकार उद्दीन से शादी की थी.

मैच रेफरी के रूप में नई इनिंग्स की शुरुआत

34 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई लेने के बाद भी कायनात ने क्रिकेट से अपना रिश्ता खत्म नहीं किया है. खिलाड़ी के रूप में पारी का अंत करने के बाद उन्होंने मैच अधिकारी के तौर पर नई शुरुआत की है.


हाल ही में पाकिस्तान में आयोजित नेशनल महिला U-19 टी20 टूर्नामेंट में उन्होंने मैच रेफरी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई. अब वह मैदान पर गेंद संभालने के बजाय मुकाबलों में नियम और अनुशासन बनाए रखने का काम करेंगी.

कायनात इम्तियाज की बड़ी उपलब्धियां

कायनात इम्तियाज का अंतरराष्ट्रीय डेब्यू अक्टूबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 मैच से हुआ था. वह पाकिस्तान की तरफ से टी20 खेलने वाली 22वीं खिलाड़ी बनीं. इसके बाद उन्होंने बांग्लादेश में आयरलैंड के खिलाफ वनडे में कदम रखा और पाकिस्तान की 64वीं वनडे खिलाड़ी बनीं.

कायनात के करियर की सबसे शानदार उपलब्धियों में एशियन गेम्स के दो गोल्ड मेडल शामिल हैं. वह 2010 (ग्वांगझू) और 2014 (इंचियोन) एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पाकिस्तानी टीम की सदस्य थीं. इसके अलावा उन्होंने 2017 महिला वनडे वर्ल्ड कप और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी देश का प्रतिनिधित्व किया.

घरेलू क्रिकेट से मिली मजबूत पहचान

अंतरराष्ट्रीय टीम में चुने जाने से पहले ही कायनात ने जूनियर स्तर पर अपनी पहचान बना ली थी. उन्होंने 2007 में कराची स्कूल्स U-17 टीम से खेलते हुए ध्यान आकर्षित किया. इसके बाद 2008 में उन्होंने लिस्ट-ए और घरेलू टी20 क्रिकेट में कदम रखा. लगभग तीन साल की कड़ी घरेलू मेहनत के बाद ही उन्हें राष्ट्रीय टीम का बुलावा आया था.

परिवार में भी क्रिकेट का माहौल

कायनात के लिए क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि पारिवारिक विरासत है. उनकी मां सलीमा इम्तियाज ने पाकिस्तान क्रिकेट में अंपायरिंग के क्षेत्र में इतिहास रचा है. सलीमा 2024 में आईसीसी (ICC) के इंटरनेशनल डेवलपमेंट पैनल में शामिल होने वाली पाकिस्तान की पहली महिला अंपायर बनी थीं. मां के अंपायर बनने के बाद अब बेटी का मैच रेफरी बनना इस परिवार के क्रिकेट से गहरे जुड़ाव को दर्शाता है.