Reetika Hooda: पेरिस ओलंपिक में भारत की पहलवान रीतिका हुड्डा 76 किलोग्राम वेट कैटेगरी में क्वार्टरफाइनल हार गईं. सवाल ये है कि ये मुकाबला 1-1 से बराबरी पर खत्म हुआ तो आखिर रेफरी ने किर्गिस्तान की पहलवान को क्यों विजेता घोषित कर दिया? दरअसल, आखिरी अंक हासिल करने की वजह से रेफरी ने विरोधी पहलवान को विजेता घोषित कर दिया. अगर यही आखिरी अंक रीतिका हासिल कर पातीं तो उन्हें विजेता घोषित कर दिया जाता. इस हार के साथ रीतिका का फाइनल में पहुंंचकर गोल्ड जीतने का सपना टूट गया लेकिन अभी भी उन्हें ब्रान्ज खेलने का मौका मिला सकता है.
रीतिका ने प्री क्वार्टर फाइनल में हगंरी की पहलावन को 12-2 के अंतर से हराया था. हालांकि, क्वार्टरफाइनल में लक ने साथ नहीं दिया. लेकिन रीतिका को मेडल जीतेन का मौका मिल सकता है. आइए जानते हैं कैसे?
🇮🇳😓 𝗗𝗲𝗳𝗲𝗮𝘁 𝗳𝗼𝗿 𝗥𝗲𝗲𝘁𝗶𝗸𝗮! Reetika Hooda faced defeat against World No. 1, Aiperi Kyzy, in the quarter-final in the women's freestyle 76kg category. Despite the result it was a great effort from her.
— India at Paris 2024 Olympics (@sportwalkmedia) August 10, 2024
🤼♀ Reetika Hooda's campaign at #Paris2024 isn't over yet as… pic.twitter.com/GOXmcmLKyb
किर्गिस्तान की पहलावन से भारत की पहलवान रीतिका को 57 किलोग्राम कैटेगरी में हार का सामना करना पड़ा. अगर किर्गिस्तान की पहलवान आयपेरी मेदेत किजी फाइनल में पहुंच जाती हैं तो भारत की रीतिका को मौका रेपचेज के तहत ब्रॉन्ज मेडल खेलने का मौका मिलेगा.
कुश्ति में रेपचेप एक ऐसी प्रक्रिया जो क्वार्टरफाइनल में हार का सामने करने वाले पहलावन को ब्रान्ज मेडल जीतने का मौका देती है. अगर आयपेरी मेदेत किजी जिन्होंने रीतिका को क्वार्टरफाइनल में हराया वह फाइनल में पहुंचती है तो रीतिका को आगे खेलने का मौका मिल सकता है.
यानी अभी भी हिंदुस्तान को मेडल मिल सकता है. बसर्ते आयपेरी मेदेत किजी फाइनल में पहुंचती हैं तो. रीतिका के घर में खुशी का माहौल था. बेटी ने जब प्री क्वार्टरफाइनल मुकाबला जीता तो घर वालों में खुशी की लहर दौड़ गई.
रीतिका हुड्डा हरियाणा के रोहतक जिले के खरकड़ा गांव से संबंध रखती हैं. रीतिका के पिता का नाम जगबीर हु्डा है. वह पेशे से एक किसान हैं. 9 साल की उम्र से रीतिका ने कुश्ती की दुनिया में कदम रखा था. पेरिस ओलंपिक के लिए सिलेक्ट होने के बाद भारतीय पहलवान ने कहा था कि जब उनका सिलेक्शन कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में नहीं हुआ तो उन्होंने कुश्ती छोड़ने का फैसला कर लिया था. लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह देते हुए उन्हें प्रेरित किया तब जाकर उन्होंने अपना फैसला बदला.