गौतम गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया का सबसे बुरा दौर, भारत को अपने घर में करना पड़ा कई शर्मनाक हार का सामना
भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ इंदौर में खेले गए तीसरे वनडे मैच में हार का सामना करना पड़ा. इसी के साथ टीम इंडिया ने सीरीज भी गंवा दी है. गौतम गंभीर की कोचिंग में भारत के नाम कई शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हुए हैं.
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम को जब गौतम गंभीर के रूप में नया मुख्य कोच मिला, तब करोड़ों फैंस को लगा था कि मैदान पर अब आक्रामक सोच और मजबूत रणनीति देखने को मिलेगी. गंभीर अपने खेल के दिनों में जुझारू तेवर और बेबाक फैसलों के लिए जाने जाते थे. लेकिन कोच बनने के बाद टीम इंडिया का प्रदर्शन उम्मीदों के बिल्कुल उलट रहा.
गौतम गंभीर ने जुलाई 2024 में भारतीय टीम की कमान संभाली. उनकी कोचिंग में भारत ने 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2025 एशिया कप जरूर जीता, जो किसी भी लिहाज से छोटी उपलब्धि नहीं थी. इन जीतों ने कुछ समय के लिए आलोचनाओं को शांत कर दिया लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने फैंस को फिर से निराश कर दिया.
टेस्ट क्रिकेट में टूटे कई साल पुराने रिकॉर्ड
गंभीर की कोचिंग में टेस्ट क्रिकेट में भारत को सबसे ज्यादा झटके लगे. घरेलू मैदान पर जहां टीम सालों से अपराजेय मानी जाती थी, वहीं अब हार आम बात हो गई.
- 12 साल बाद भारत को पहली बार घरेलू टेस्ट सीरीज में हार झेलनी पड़ी.
- 25 साल बाद घरेलू टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा.
- अक्टूबर 2024 में घरेलू टेस्ट में भारत का अब तक का सबसे कम स्कोर बना.
- नवंबर 2025 में रनों के अंतर से सबसे बड़ी टेस्ट हार दर्ज हुई.
- पहली बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जगह नहीं बना सके.
- ये सभी नतीजे भारतीय टेस्ट इतिहास पर गहरे सवाल खड़े करते हैं.
वनडे क्रिकेट में भी हालात नहीं रहे बेहतर
वनडे फॉर्मेट में भी टीम इंडिया का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. अगस्त 2024 में भारत को श्रीलंका से वनडे सीरीज हारनी पड़ी, जो 1997 के बाद पहली बार हुआ. इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज भी भारत के हाथ से निकल गई.
इंदौर में खेले गए तीसरे वनडे में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रनों से हराकर सीरीज 2-1 से जीत ली. यह भारत में न्यूजीलैंड की पहली वनडे सीरीज जीत थी, जिसने हार का दर्द और बढ़ा दिया.
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी और घरेलू दबदबे पर असर
गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारत को 2015 के बाद पहली बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी भी गंवानी पड़ी. घरेलू मैदान पर जो दबदबा वर्षों में बना था, वह धीरे-धीरे कमजोर होता दिखा. विरोधी टीमें अब भारत को उसी के घर में चुनौती देने लगीं और कई बार जीत भी हासिल की.