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शादी से पहले जान लें यह कानून, इन हालात में नहीं बनता मैरिज सर्टिफिकेट; पहले से रहें तैयार

भारत में मैरिज सर्टिफिकेट केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि वैवाहिक रिश्ते की कानूनी पहचान है. हालांकि, इसके लिए कुछ तय नियम और शर्तें हैं. कई मामलों में शादी होने के बावजूद मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बन पाता.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: भारत में मैरिज सर्टिफिकेट केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि वैवाहिक रिश्ते की कानूनी पहचान है. हालांकि, इसके लिए कुछ तय नियम और शर्तें हैं. कई मामलों में शादी होने के बावजूद मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बन पाता. उम्र, वैवाहिक स्थिति, सहमति और वैध विवाह कानूनों का पालन न होने पर आवेदन रद्द हो सकता है. शादी से पहले इन नियमों को जानना बेहद जरूरी है.

शादी हर व्यक्ति के जीवन का एक अहम पड़ाव होता है, जहां दो लोग साथ जीवन बिताने का संकल्प लेते हैं. आज के समय में शादी के बाद मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना लगभग अनिवार्य हो गया है.

मैरिज सर्टिफिकेट की कहां-कहां पड़ती है जरुरत

सरकारी और कानूनी कामों में इसकी जरूरत पड़ती है, लेकिन कई लोग नियमों की जानकारी न होने के कारण परेशानी में पड़ जाते हैं. ऐसे में शादी से पहले मैरिज सर्टिफिकेट से जुड़े नियम जानना जरूरी है.

सभी धर्मों के लिए अलग कानून

भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए विवाह से जुड़े कानून बनाए गए हैं. हिंदू विवाह अधिनियम, विशेष विवाह अधिनियम और अन्य धार्मिक कानूनों के तहत ही मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है. अगर शादी इन कानूनों के अनुसार मान्य नहीं है, तो प्रमाण पत्र नहीं बनता. केवल सामाजिक या पारिवारिक रस्मों से हुई शादी हर स्थिति में कानूनी रूप से मान्य नहीं मानी जाती.

कब नहीं बन पाता मैरिज सर्टिफिकेट

-मैरिज सर्टिफिकेट के लिए उम्र एक अहम शर्त है. कानून के अनुसार, लड़के की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होनी चाहिए. यदि शादी के समय इनमें से कोई भी तय उम्र से कम है, तो आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता. कई मामलों में उम्र से जुड़े दस्तावेजों की कमी भी सर्टिफिकेट बनने में बाधा बनती है.

-पहले से विवाहित होना भी मैरिज सर्टिफिकेट न बनने का बड़ा कारण है. यदि पति या पत्नी में से कोई पहले से शादीशुदा है और उसका तलाक कानूनी रूप से मान्य नहीं है, तो दूसरी शादी का सर्टिफिकेट नहीं बनता. ऐसे मामलों में वैवाहिक स्थिति छिपाने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.

-शादी में दोनों पक्षों की सहमति भी जरूरी शर्त है. यदि यह साबित हो जाए कि विवाह दबाव, धोखे या जबरदस्ती से हुआ है, तो उसे मान्यता नहीं मिलती. साथ ही, नजदीकी रिश्तों में हुई शादी, जिसे कानून अनुमति नहीं देता, उसके लिए भी मैरिज सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता.

-मैरिज सर्टिफिकेट के लिए जरूरी दस्तावेजों की कमी भी आवेदन रद्द होने की वजह बनती है. पहचान पत्र, उम्र प्रमाण, शादी की तारीख और स्थान से जुड़े प्रमाण सही न होने पर प्रक्रिया अटक जाती है. इसलिए शादी के बाद नहीं, बल्कि शादी से पहले ही नियमों और कागजात की जानकारी रखना समझदारी मानी जाती है.