दो दिन में तीन बार टूटा 100 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड! PM मोदी ने 'मन की बात' में तारीफ में पढ़े कसीदे

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में करीब 800 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. इस प्रतियोगिता के दौरान चार अलग-अलग स्पर्धाओं में राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे.

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Meenu Singh

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' में इस बार भारतीय एथलेटिक्स की नई उड़ान पर चर्चा की. हाल के दिनों में भारतीय धावकों ने जिस तरह राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े हैं, उसने देशभर के खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. खासतौर पर 100 मीटर दौड़ में रिकॉर्ड टूटने की रफ्तार ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय एथलेटिक्स अब नए दौर में प्रवेश कर चुका है. इसी उपलब्धि को लेकर प्रधानमंत्री ने युवा खिलाड़ियों की सराहना की और उनकी प्रेरणादायक यात्रा को देशवासियों के सामने रखा.

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में करीब 800 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. इस प्रतियोगिता के दौरान चार अलग-अलग स्पर्धाओं में राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे. गुरिंदरवीर सिंह, अनिमेष कुजूर, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार जैसे खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाई.

100 मीटर दौड़ बनी चर्चा का केंद्र

PM मोदी ने विशेष रूप से मेंस की 100 मीटर दौड़ का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि महज दो दिनों के अंदर इस स्पर्धा का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा, जो भारतीय खेल इतिहास में एक असाधारण उपलब्धि है. गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर ने अपने शानदार प्रदर्शन से यह रिकॉर्ड अपने नाम किया और देशभर में सुर्खियां बटोरीं.

खिलाड़ियों से की सीधी बातचीत

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान दोनों एथलीटों से बातचीत भी की. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि जैसे संगीत में जुगलबंदी होती है, वैसे ही अब खेलों में भी रिकॉर्ड तोड़ने की जुगलबंदी देखने को मिल रही है. पीएम ने दोनों खिलाड़ियों के संघर्ष और उपलब्धियों को देश के सामने लाने की इच्छा जताई.

फुटबॉल से एथलेटिक्स तक का सफर

बातचीत के दौरान अनिमेष कुजूर ने अपने खेल जीवन के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि वह मूल रूप से छत्तीसगढ़ से हैं और वर्तमान में ओडिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं. अनिमेष ने खुलासा किया कि शुरुआत में वह फुटबॉल खेलते थे. कोविड काल के दौरान दौड़ने की आदत ने उन्हें एथलेटिक्स की ओर आकर्षित किया.

दोस्तों के कहने पर उन्होंने एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जहां से उनका चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ. आज वही खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन चुका है.