एक WhatsApp मैसेज और 15 छक्के! 14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने कैसे रचा इतिहास, कोच ने खोला राज
वैभव सूर्यवंशी के जोरदार शतक के पीछे छुपा एक राज. कोच मनीष ओझा का एक चैलेंज और एक बेहद बारीक तकनीकी सलाह, जिसने बदल दी टीम इंडिया की दास्तान.
India vs England U19 World Cup 2026 Final: क्रिकेट में अक्सर एक छोटी सी सलाह इतिहास बदल देती है. ऐसा ही कुछ हुआ U-19 वर्ल्ड कप फाइनल से ठीक पहले हुआ. 14 साल के वंडर बॉय वैभव सूर्यवंशी ने जब इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की आंधी चलाई, तो उसके पीछे उनके कोच मनीष ओझा का एक चैलेंज और एक बेहद बारीक तकनीकी सलाह थी.
कोच का ताना बना प्रेणा
अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल जीतने के बाद वैभव ने 68 रन बनाए थे. कोच ओझा ने उन्हें बधाई देने के बजाय एक शिकायत भरा WhatsApp मैसेज भेजा. ओझा ने लिखा, "यह पहला टूर्नामेंट होगा जिसमें तुम्हारी एक भी सेंचुरी नहीं होगी. एक बार फाइनल में सेट हो गए, तो छोड़कर मत आना." गुरु का यह संदेश शिष्य के दिल पर लग गया. शुक्रवार को हरारे के मैदान पर जो हुआ, वह इतिहास है. 15 छक्के, 15 चौके और सिर्फ 55 गेंदों में वर्ल्ड कप का दूसरा सबसे तेज शतक.
मनीष ओझा कौन हैं
- मनीष ओझा पूर्व रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी हैं.
- बिहार के युवा क्रिकेटरों को निखारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
- वैभव सूर्यवंशी के मेंटर और तकनीकी कोच.
- क्रिकेट करियर छोड़ने के बाद पूरी तरह कोचिंग को समर्पित.
कोचिंग करियर की शुरुआत
मनीष ओझा का खुद का एक मजबूत क्रिकेट करियर रहा है. उन्होंने बिहार की तरफ से रणजी ट्रॉफी खेली और घरेलू क्रिकेट में शानदार योगदान दिया. क्रिकेट से रिटायर होने के बाद उन्होंने कोचिंग में कदम रखा और अपना पूरा ध्यान युवा प्रतिभाओं को तराशने पर लगा दिया.
वैभव सूर्यवंशी के साथ सफर
जब वैभव सूर्यवंशी 9 साल की उम्र में क्रिकेट अकैडमी पहुंचे, तब उन्होंने कई कोचों की नजरें अपनी ओर खींची। लेकिन मनीष ओझा ने उनकी कच्ची तकनीक को निखारने का बीड़ा उठाया.
पुल शॉट में दिक्कत
पुल शॉट का वह टेक्निकल पेच, लेकिन यह पारी सिर्फ गुस्से या जोश का नतीजा नहीं थी. कोच ओझा ने बताया कि वैभव को पुल शॉट में दिक्कत आ रही थी. ऑफ-स्टंप के बाहर की शॉर्ट गेंदों पर उनका सिर पीछे झुक रहा था, जिससे कैच उठने top-edge का डर था.
कोच की सलाह
कोच ने सलाह दी कि सिर सीधा रखो या गेंद की तरफ थोड़ा झुकाओ, ताकि बाहें पूरी खुल सकें और शॉट में पावर आए. वैभव ने फाइनल में इसे बखूबी लागू किया और इंग्लैंड के गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ दी.
मैदान पर बाहुबली, बाहर अभी भी बच्चा
इतनी कम उम्र में आईपीएल, रणजी और विजय हजारे ट्रॉफी खेलने वाले वैभव ने पिछले एक साल में घर पर मुश्किल से एक हफ्ता बिताया है. चकाचौंध से दूर रखने के लिए उनका परिवार अक्सर घरेलू मैचों के दौरान उनके साथ ट्रेवल करता है.
कोच हुए भावुक
कोच ओझा भावुक होकर कहते हैं, "वैभव एक स्पेशल टैलेंट है, जिसे मैंने कभी डांटा नहीं. वह एक बार की बात को दो बार प्रैक्टिस करता है, लेकिन आखिर में, वह 14 साल का है... एक बच्चा ही तो है." वैभव की यह पारी सिर्फ रनों का अंबार नहीं, बल्कि एक बच्चे के वर्ल्ड क्लास एथलीट बनने की कहानी है.