नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में हाल ही में सबसे ज्यादा चर्चा संजू सैमसन की हो रही है. टी20 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई है. केरल से आने वाले इस विकेटकीपर बल्लेबाज की सफलता पर शशि थरूर ने एक भावुक लेख लिखा है. उन्होंने सैमसन से अपनी पहली मुलाकात से लेकर उनके संघर्ष और आज की उपलब्धियों तक कई दिलचस्प यादें साझा की हैं.
शशि थरूर ने अपने लेख में लिखा कि उन्हें सैमसन से पहली मुलाकात आज भी साफ याद है. उस समय वह एक दुबले-पतले किशोर थे, जिनके चेहरे पर आत्मविश्वास भरी मुस्कान थी. बल्ला जैसे उनके हाथ का स्वाभाविक हिस्सा लगता था. थरूर को तभी लगा था कि यह खिलाड़ी आगे जाकर खास पहचान बनाएगा. उनके अनुसार सैमसन में कम उम्र में ही गजब का संतुलन, धैर्य और खेल की समझ दिखाई देती थी.
थरूर ने यह भी माना कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सैमसन को हमेशा उतने मौके नहीं मिले, जितने मिलने चाहिए थे. कई बार वह टीम का हिस्सा तो रहे, लेकिन उन्हें लगातार समर्थन नहीं मिला. कुछ अन्य खिलाड़ियों को प्राथमिकता मिलने से वह पीछे रह गए. इसके बावजूद सैमसन ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने खेल पर भरोसा बनाए रखा और मौके का इंतजार करते रहे.
टी20 वर्ल्ड कप में जब उन्हें आखिरकार खेलने का मौका मिला, तो उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. अहम मुकाबलों में उन्होंने लगातार बड़ी पारियां खेलीं. क्वार्टरफाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में उनके बल्ले से निकले रन भारत की जीत में निर्णायक साबित हुए. इस प्रदर्शन के बाद सैमसन को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया. इससे उनका आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा दोनों बढ़े.
थरूर ने बताया कि 2009 में उन्होंने मजाक-मजाक में सैमसन से कहा था कि वह आगे चलकर अगले महेंद्र सिंह धोनी बन सकते हैं. बाद में जब उन्होंने यह बात अपने मित्र गौतम गंभीर को बताई, तो गंभीर ने हंसते हुए कहा कि सैमसन को किसी का दूसरा रूप बनने की जरूरत नहीं है. वह अपनी अलग पहचान बनाएंगे.
थरूर ने एक और घटना का जिक्र किया. स्कूल के दिनों में सैमसन क्रिकेट खेलने के कारण कई बार कक्षाओं में उपस्थित नहीं रह पाते थे. इसी वजह से उनकी परीक्षा में बैठने की पात्रता पर सवाल उठ गया. तब थरूर ने संबंधित लोगों से बात कर यह सुनिश्चित किया कि खेल में उनकी उपलब्धियों को भी महत्व दिया जाए. आखिरकार उन्हें परीक्षा देने की अनुमति मिली और उन्होंने पढ़ाई भी पूरी की.