नई दिल्ली: भारतीय टी20 क्रिकेट में में सूर्या का सूर्यास्त हो गया है. टीम में सूर्यकुमार यादव का युग समाप्त हो चुका है. जिस खिलाड़ी ने 30 साल की उम्र में भारत के लिए पदार्पण किया, टी20 विश्व कप के फाइनल में मैच जिताने वाला कैच पकड़ा और दूसरे टी20 विश्व कप के फाइनल में भारत को जीत दिलाई, उसे 35 साल की उम्र में अचानक टीम से बाहर कर दिया गया है.
श्रेयस अय्यर की कप्तानी की क्षमता और उससे भी महत्वपूर्ण, उनकी शानदार फॉर्म पर शायद ही कोई संदेह कर सकता है, लेकिन T20 अंतरराष्ट्रीय टीम से सूर्यकुमार यादव को पूरी तरह से हटाना कितना सही है? सूर्या को पूरी तरह से टी20 प्रारूप से हटाने के बाद अब सोशल मीडिया पर इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या भारतीय टीम को अहम टूर्नामेंट्स में सफलता दिलाने वाले कप्तान को इस प्रकार विदा करना कितना सही है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2024 में रोहित शर्मा के संन्यास के बाद सूर्यकुमार यादव को टी20 टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उन्होंने इस भूमिका को शानदार तरीके से निभाया और टीम को लगातार सफलता दिलाई.
सूर्या की सफल कप्तानी की गाथा उनके आंकड़े बयां करते हैं, सूर्या ने 52 मैचों में 42 जीत, 80.7 प्रतिशत की जीत दर के साथ, जो भारत के टी20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास में किसी भी कप्तान की सबसे ज्यादा है. सूर्यकुमार ने कप्तान के रूप में एक भी सीरीज नहीं हारी और इसके अलावा एशिया कप और घरेलू टी20 विश्व 2025 का सफल बचाव किया.
हालांकि इस बात से इनकार करना मुश्किल है कि सूर्यकुमार यादव पिछले कुछ महीनों में अपने पुराने फॉर्म में नहीं दिखे हैं. सूर्यकुमार की खराब फॉर्म की समस्या एशिया कप 2025 से ही जगजाहिर थी. इसके बावजूद, भारत के पहले टी20 विश्व कप 2026 मैच में अमेरिका के खिलाफ सूर्यकुमार ने 49 गेंदों में 84* रनों की मैच-विनिंग पारी खेली थी. सूर्या IPL 2026 में भी वह बड़ी पारियां खेलने में संघर्ष करते नजर आए. माना जा रहा है कि यही कारण चयनकर्ताओं के फैसले पर असर डाल रहा है.
सूर्यकुमार यादव ने भारतीय टी20 बल्लेबाजी को नई दिशा दी. उनकी आक्रामक ने टीम के खेलने के तरीके को बदलने में अहम भूमिका निभाई. भारतीय टी20 क्रिकेट में सूर्या का योगदान बल्ले से बनाए गए रनों से कहीं ज्यादा है. एक कप्तान के तौर पर, स्काई इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकते थे, उनके साथ जो भी हुआ वह इससे कहीं बेहतर के हकदार थे.