Bangladesh Protest: बांग्लादेश में पिछले 2 महीने से चल रहे आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन ने भीषणकारी रुप ले लिया है. प्रदर्शनकारियों का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा. प्रदर्शनकारियों ने सड़क से PM आवास तक हमला बोला हुआ है. दंगे की इस आग में झुलसने से क्रिकेट भी नहीं बच सका है. सोशल मीडिया पर सामने आ रही खबरों की मानें तो प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के कई बड़े खिलाड़ियों के घर तक फूंक डाले हैं.
सोशल मीडिया पर फैली खबरों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने पूर्व क्रिकेटर मशर्फे मर्तजा और विकेटकीपर बल्लेबाज लिटन दास के घर पर हमला किया. आग लगा दी. तोड़ फोड़ भी की. हालांकि अब तक इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
Reportedly Bangladeshi Hindu cricketer Liton Das house has been set on fire, his family is beaten and sexualy assaulted by terrorists of Jamaat-e-Islami in Bangladesh.#SaveBangladeshiHindus pic.twitter.com/LSDrRsIXsU
— Baba Banaras™ (@RealBababanaras) August 5, 2024
Litton Das house has been put on fire by Kangladeshis 🔥🔥#BangladeshBleeding pic.twitter.com/s1uWicMhLR
— SURESH YADAV (@MyWaySkyWay17) August 5, 2024
काम का हो या ना हो जो मिल जाए सब लूट लो 🙄
— ⍣ Mɽ Pẘŋ ⍣ (@Pwn_rj25) August 6, 2024
सच में बांग्लादेश के हालात बहुत तो खराब नजर आ रहे हैं 🥺🥺
यहां तक की पार्लियामेंट में भी लोगों ने अधिकार जमा लिया 🙊#ShaikhHasina #Bangladesh #LitonDas #BangladeshUnderAttack pic.twitter.com/1Ww5JTVsVM
क्रिकेट पर हुआ दंगे का असर
देश में फैली आंदोलन की इस आग में काफी कुछ जल रहा है. इससे क्रिकेट भी प्रभावित हुआ है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 5 अगस्त को एक बयान जारी किया, जिसमें उसने बताया कि वो अपनी A-टीम के पाकिस्तान दौरे में बदलाव करेंगे. अपने देश के आंतरिक हालात को देखते हुए उन्हें ये फैसला करने पर मजबूर होना पड़ा है.
दरअसल, बांग्लादेश की ए टीम 6 अगस्त को पाकिस्तान के लिए रवाना होने वाली थी. इस दौरे पर उसे 2 चार दिनी मैच और 3 वनडे की सीरीज पाकिस्तान की ए टीम यानी शाहीन्स से खेलनी थी.
आखिर क्यों बांग्लादेश में भड़क गई हिंसा?
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आरक्षण है. यहां सरकारी नौकरियों मे 56 फीसदी आरक्षण लागू है. इसमें से 30 फीसदी आरक्षण अकेले 1971 के मुक्ति संग्राम में भाग लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को मिलता है. इसके अलावा 10% आरक्षण सामाजिक-आर्थिक तौर पर पिछड़े जिलों के लिए है और 10 फीसदी महिलाओं के लिए, जबकि 5 फीसदी आरक्षण जातिगत अल्पसंख्यक समूहों के लिए और एक फीसदी दिव्यांगों के लिए है.
क्या है प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों का विरोध मुक्ति संग्राम के परिवार वालों को मिलने वाला 30 फीसदी आरक्षण है. उनका तर्क है कि इससे मेरिट वाले नौजवानों को नौकरी नहीं मिल रही है, बल्कि अयोग्य लोगों को सरकारी नौकरी में भरा जा रहा है. छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद सरकार ने अधिकांश कोटा वापस ले लिया है, लेकिन अब लड़ाई आरक्षण से हटकर प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग पर आ गई है.
अब तक 300 से ज्यादा मौतें
बांग्लादेश में इस वक्त हिंसक आग है. अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इसमें छात्र, पुलिसकर्मी, पत्रकार आम लोग भी शामिल हैं. राजधानी ढाका समेत देश के ज्यादातर हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है.