2026 एशियन गेम्स से पहले भारतीय टेनिस टीम के चयन पर विवाद गहरा गया है. AITA ने मंगलवार को सफाई देते हुए कहा कि उसने छह खिलाड़ियों के नाम को लेकर भारतीय ओलंपिक संघ को पत्र भेजा था. संघ ने रिपोर्ट को गलत बताया और अपनी चयन प्रक्रिया का बचाव किया.
AITA के मुताबिक, 3 जुलाई को IOA के CEO रघुराम अय्यर को पत्र भेजा गया था. इसमें मानस धामने, अंकिता रैना, सहजा यमलपल्ली, वैदेही चौधरी, वैष्णवी अडकर और प्रार्थना थोम्बरे को टीम में शामिल करने की मांग की गई थी. संघ ने कहा कि उसका मकसद भारत की सबसे मजबूत टेनिस टीम उतारना था. AITA ने उस रिपोर्ट को भी गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि इन खिलाड़ियों के नाम लंबी सूची में नहीं थे. संघ का कहना है कि उसके पास नाम भेजने और चयन की मांग करने के दस्तावेज मौजूद हैं.
चयन विवाद में शामिल खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी चर्चा का विषय है. सहजा यमलपल्ली भारत की शीर्ष महिला सिंगल्स खिलाड़ियों में शामिल हैं. वहीं वैष्णवी अडकर भी देश की प्रमुख खिलाड़ियों में हैं. मानस धामने चैलेंजर फाइनल तक पहुंच चुके हैं. वैदेही चौधरी दो बार की नेशनल चैंपियन हैं और प्रार्थना थोम्बरे एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं. खेल मंत्रालय अपने चयन नियमों का बचाव कर रहा है. नियमों के अनुसार सिंगल्स खिलाड़ियों के लिए एशिया में टॉप-6 और डबल्स खिलाड़ियों के लिए टॉप-8 का मानदंड रखा गया है.
AITA ने साफ कहा कि उसकी चयन समिति ने जिन खिलाड़ियों को चुना है, उन्हें एशियन गेम्स टीम में जगह मिलनी चाहिए. संघ का तर्क है कि अगर किसी खिलाड़ी के शामिल होने से भारत के मेडल जीतने की संभावना बढ़ती है, तो उसे सिर्फ चयन नियमों के कारण बाहर नहीं किया जाना चाहिए. पूर्व भारतीय खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. इस पूरे विवाद के बीच AITA ने दोहराया है कि 3 जुलाई को भेजा गया उसका पत्र भारतीय टेनिस के हित में था और उसका उद्देश्य मजबूत टीम तैयार करना था.