बल्लेबाज नहीं, रन मशीन है ये क्रिकेटर, 9 मैचों में 5 शतक ठोककर टीम इंडिया के दरवाजे खटखटा रहा ये 25 साल का खिलाड़ी
विदर्भ के ओपनर बल्लेबाज अमन मोखाड़े ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने 9 मैचों में 5 शतक और 781 रन बनाकर, फाइनल में विदर्भ को जगह दिलाई, अब टीम इंडिया के दरवाजे खटखटा रहे हैं.
विदर्भ के बल्लेबाज अमन मोखाड़े ने घरेलू क्रिकेट में अपने अद्भुत प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है. विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के सेमीफाइनल में कर्नाटक के खिलाफ 138 रन की शतकीय पारी खेलकर उन्होंने टीम को फाइनल में पहुंचा दिया. 24-25 साल के इस युवा खिलाड़ी ने टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया, 9 मैचों में 5 शतक लगाए और लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं.
बल्लेबाजी का दिखाया जलवा
अमन मोखाड़े ने सेमीफाइनल मैच में कर्नाटक के खिलाफ 138 रन बनाए. उनकी पारी के दम पर विदर्भ ने 22 गेंद पहले ही 6 विकेट से जीत हासिल कर ली. यह पारी उनके जन्मदिन से सिर्फ एक दिन पहले खेली गई, जिससे यह और भी ज्यादा खास बन गई. अमन की बल्लेबाजी ने टूर्नामेंट में उन्हें ‘रन मशीन’ का खिताब दिलाया.
कौन हैं अमन मोखाड़े?
अमन का जन्म 16 जनवरी 2001 को हुआ था. उन्होंने कोच ज्वाला सिंह से क्रिकेट की ट्रेनिंग ली, जिन्होंने टीम इंडिया के यशस्वी जायसवाल को भी प्रशिक्षित किया है. अमन टॉप ऑर्डर बल्लेबाज हैं और लेग ब्रेक स्पिन भी करते हैं. 2025-26 के घरेलू सीजन में उन्होंने रणजी ट्रॉफी में 577 रन बनाए, जिसमें 3 शतक शामिल थे.
विजय हजारे ट्रॉफी में मचाया धमाल
अमन ने इस टूर्नामेंट में कुल 9 मैच खेले और 5 शतक लगाए. उन्होंने पहले मैच में 110 रन बनाए और दूसरे मैच में 82 रन. इसके बाद लगातार शतक लगाए और विदर्भ को फाइनल में पहुंचाया. उनका स्ट्राइक रेट और लगातार रन बनाना टीम के लिए बेहद लाभकारी साबित हुआ.
रिकॉर्ड और उपलब्धियां
अमन ने इस टूर्नामेंट में 781 रन बनाए और कर्नाटक के देवदत्त पडिक्कल को पीछे छोड़ दिया. लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज 1000 रन पूरा करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनकर उन्होंने इतिहास रचा. उनकी 16वीं पारी में यह उपलब्धि हासिल हुई, जो उनकी निरंतरता और कड़ी मेहनत को दर्शाती है.
टीम इंडिया का दरवाजा
अमन मोखाड़े का प्रदर्शन अब उन्हें टीम इंडिया की नजरों में ला रहा है. घरेलू स्तर पर लगातार रन बनाने और दबाव के समय शतकीय पारी खेलने की क्षमता ने उन्हें सीनियर चयनकर्ताओं की राडार पर ला दिया है. विदर्भ के युवा इस सीजन में अपने खेल से देशभर में नाम कमा रहे हैं.
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