टी20 वर्ल्ड कप फाइनल से पहले सबसे ज्यादा चर्चा किसी खिलाड़ी की नहीं, बल्कि अहमदाबाद की पिच की हो रही है. नरेंद्र मोदी स्टेडियम की सतह इस टूर्नामेंट में बल्लेबाजों के लिए सबसे आसान मानी गई है, जबकि स्पिन गेंदबाजों को यहां खास मदद नहीं मिलती. ऐसे में भारत और न्यूजीलैंड दोनों के कप्तानों के सामने बड़ा सवाल है कि स्पिन का इस्तेमाल कितनी सावधानी से किया जाए. खासकर वरुण चक्रवर्ती और मिचेल सैंटनर की भूमिका इस मैदान पर काफी दिलचस्प होने वाली है.
नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच इस टी20 वर्ल्ड कप में स्पिन गेंदबाजों के लिए सबसे कठिन साबित हुई है. यहां खेले गए छह मैचों में स्पिनरों ने सिर्फ 80 ओवर डाले, जो टूर्नामेंट के सभी मैदानों में सबसे कम है. यही नहीं, यहां स्पिन गेंदबाजों की इकॉनमी 9.32 रही है, जो पूरे टूर्नामेंट के औसत से काफी ज्यादा है. इसका मतलब साफ है कि बल्लेबाजों को यहां शॉट खेलने में ज्यादा परेशानी नहीं होती.
भारत के मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती हाल के मैचों में महंगे साबित हुए हैं. दिसंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इसी मैदान पर उन्होंने पहली बार टी20 में 50 से ज्यादा रन दिए थे. सुपर-8 मुकाबले में भी वह 4 ओवर में 47 रन खर्च कर बैठे थे. सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उनके 4 ओवर में 64 रन देना उनके टी20 करियर का सबसे महंगा स्पेल रहा. ऐसे में फाइनल में उनका चयन एक बड़ा फैसला बन सकता है.
न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर के लिए भी यह मैदान आसान नहीं रहा है. अहमदाबाद में खेले दो टी20 मैचों में उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला. हाल ही में भारत के खिलाफ तिरुवनंतपुरम में भी उन्होंने 4 ओवर में 60 रन दे दिए थे, जो उनके लंबे टी20 करियर का सबसे महंगा स्पेल था. इसलिए फाइनल में वह स्पिन का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर कर सकते हैं.
इस फ्लैट पिच का फायदा भारत के आक्रामक बल्लेबाज उठा सकते हैं. अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी तेज रन बनाने की क्षमता रखते हैं. अगर शुरुआती ओवरों में स्पिनरों को दबाव में रखा गया, तो मैच का रुख जल्दी बदल सकता है. इसी वजह से अहमदाबाद की पिच इस फाइनल का सबसे बड़ा एक्स-फैक्टर बन सकती है.