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रमजान के महीने में क्यों खास है शब-ए-कद्र की रात, जानें क्या है ऐतिहासिक महत्व

Shab-e-Qadr in Ramdan: मुसलमानों के लिए साल के सबसे पवित्र महीने रमजान में शब-ए-कद्र की रात को सबसे अहम माना जाता है, आखिर इस रात में ऐसा क्या है और इसके ऐतिहासिक महत्व क्या है इस पर एक नजर डालते हैं-

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India Daily Live

Shab-e-Qadr in Ramdan: रमजान का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए स्प्रिचुएल अवेकनिंग, दान-पुण्य और ईश्वर के प्रति समर्पण का समय होता है. इस महीने के दौरान, मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं, विशेष प्रार्थनाएं करते हैं, और कुरान का पाठ करते हैं. मुस्लिम धर्म को मानने वालों के लिए यह महीना सबसे पवित्र होता है लेकिन इस महीने में भी एक रात होती है जिसका खासा महत्व होता है.

हम बात कर रहे हैं रमजान के दौरान मनाई जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण रातों में से एक शब-ए-कद्र की, जिसके दौरान माना जाता है कि अगर आप इस रात को अल्लाह की प्रार्थना करते हैं तो आपको हजारों रातों के बराबर इबादत करने का पुण्य प्राप्त होता है. ऐसे में आइये समझते हैं कि ये रात इतनी महत्वपूर्ण क्यों है और इसकी ऐतिहासिक महत्ता क्या है.

क्यों खास है शब-ए-कद्र की रात?

शब-ए-कद्र का अर्थ है "महिमा की रात". यह रमजान के अंतिम दस दिनों में किसी भी विषम रात को मनाई जाती है, माना जाता है कि इस रात कुरान को धरती पर उतारा गया था. यह रात मुसलमानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसे प्रार्थना और इबादत में बिताया जाता है.

जानें शब-ए-कद्र की रात का ऐतिहासिक महत्व

इतिहासकारों का मानना है कि रमजान का महीना 7वीं शताब्दी ईस्वी में शुरू हुआ था, जब पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) को पहली बार कुरान की आयतें प्राप्त हुई थीं. हालाँकि, सटीक तिथि स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है. माना जाता है कि शब-ए-कद्र रमजान के अंतिम दस दिनों में किसी भी रात को होती है, लेकिन लेयलत अल-कद्र (27वीं रात) को मनाने की परंपरा है.

रमजान और शब-ए-कद्र का महत्व सदियों से चला आ रहा है और यह इस्लामी संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन गया है. यह मुसलमानों को अपने विश्वास को मजबूत करने और एक बेहतर इंसान बनने का अवसर प्रदान करता है.

क्यों खास होता है रमजान का महीना

मुसलमानों के लिए रमजान के महीने के खास होने के कई कारण हैं, आइये विस्तार से इस पर एक नजर डालते हैं.

कुरान का अवतरण: जैसा कि ऊपर बताया गया है धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी महीने में कुरान को पैगंबर मुहम्मद ने जमीन पर उतारा था. कुरान को इस्लाम की धर्मग्रंथ माना जाता है और यह मुसलमानों के जीवन का मार्गदर्शक है.

आत्मिक शुद्धि: रमजान का महीना आत्मिक शुद्धि और ईश्वर के प्रति समर्पण का अवसर प्रदान करता है. उपवास रखने से व्यक्ति आत्मसंयम और अनुशासन सीखता है. साथ ही, दान-पुण्य करने से दया और करुणा की भावना विकसित होती है.

समुदायिक सरोकार: रमजान का महीना मुसलमानों को एकजुट होने और समुदाय की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है. इftar (भोजन) के सामूहिक आयोजन से लोग एक दूसरे के करीब आते हैं और गरीबों एवं जरूरतमंदों की मदद करते हैं.

क्षमा: रमजान का महीना न केवल दूसरों को क्षमा करने का बल्कि स्वयं को क्षमा करने का भी अवसर प्रदान करता है. उपवास के माध्यम से व्यक्ति अपने किए पर चिंतन करता है और गलतियों के लिए पछतावा करता है. इस महीने में दया और क्षमा का भाव बढ़ जाता है.

हेल्थ लाभ: उपवास रखने से शरीर को आराम मिलता है और पाचन तंत्र दुरुस्त होता है. साथ ही, रमजान में सादा और संतुलित भोजन करने से सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

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