चंडीगढ़: भगवंत सिंह मान सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुरू किया गया ‘महिला उद्यमी सम्मान कार्यक्रम’ राज्य भर की महिलाओं से मिले जबरदस्त समर्थन से सुर्खियों में है. यह पहल महिलाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (PSRLM) के तहत चलाए जा रहे इस कार्यक्रम में अब तक 28,000 से अधिक नामांकन प्राप्त हो चुके हैं, जो महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भरता की इच्छा को उजागर करता है.
कार्यक्रम का पहला चरण 2 मार्च से 6 मार्च तक पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ. प्रत्येक क्षेत्र में गांवों और शहरों की 100 महिला उद्यमियों को उनके छोटे व्यापार, घरेलू उद्योग, कृषि, सर्विस सेक्टर और स्वरोजगार में योगदान के लिए सम्मानित किया गया. कुल मिलाकर विधानसभा स्तर पर लगभग 11,700 महिला उद्यमियों को पुरस्कृत किया गया. स्थानीय विधायकों, प्रशासनिक अधिकारियों और समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में इन समारोहों ने महिलाओं में नई ऊर्जा भरी.
अब कार्यक्रम जिला स्तर पर पहुंच चुका है, जहां 23 जिलों से प्रत्येक जिले की 100 महिलाओं यानी कुल 2,300 महिला उद्यमियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा. ये चयन विधानसभा स्तर पर सम्मानित महिलाओं में से किए जा रहे हैं. जिला स्तर के कार्यक्रमों में महिलाओं के छोटे-बड़े कारोबारों की सफल कहानियां साझा की जा रही हैं.
कार्यक्रम का चरमोत्कर्ष 18 मार्च को राज्य स्तरीय समारोह में होगा, जहां पंजाब भर की टॉप 100 महिला उद्यमियों को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सम्मानित करेंगे. प्रत्येक चुनी गई महिला को उनकी उद्यमशीलता की उपलब्धियों के लिए 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा. कुल मिलाकर पूरे कार्यक्रम में 14,100 महिला उद्यमियों को विभिन्न स्तरों पर सम्मानित किया जाएगा.
पंजाब सरकार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को महज 8 मार्च के एक दिन तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इसे महिला सशक्तिकरण समर्पित महीने भर के जश्न के रूप में मना रही है. ‘महिला उद्यमी सम्मान कार्यक्रम’ जैसी पहलों से सरकार का उद्देश्य महिलाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने, अपने समुदायों में आर्थिक बदलाव लाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना है.
इस कार्यक्रम की हर तरफ सराहना हो रही है, क्योंकि यह राज्य की अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान को मान्यता देता है और हजारों अन्य महिलाओं को इनोवेशन एवं स्वरोजगार की राह पर प्रेरित कर रहा है. स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों की दर 18% से घटकर 2.16% होना भी सरकार की महिला-केंद्रित नीतियों की सफलता का प्रमाण है.