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रात में फोन देखना सुला सकता है मौत की नींद, दिल को बीमार बना रही स्क्रीन की रोशनी

अध्ययन में पाया गया है कि रात में मोबाइल, टीवी या अन्य स्क्रीन की तेज रोशनी के संपर्क में आने से हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है. अध्ययन के अनुसार, रात में रोशनी से दिल का दौरा 47%, कोरोनरी धमनी रोग 32%, और स्ट्रोक 28% तक बढ़ सकता है.

Kanhaiya Kumar Jha
रात में फोन देखना सुला सकता है मौत की नींद, दिल को बीमार बना रही स्क्रीन की रोशनी
Courtesy: Gemini AI

नई दिल्ली : ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. शोध के अनुसार, रात में तेज़ रोशनी, जैसे मोबाइल फोन, टीवी या अन्य स्क्रीन से निकलने वाली लाइट के संपर्क में आने से हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) का खतरा 56% तक बढ़ सकता है. यह अध्ययन जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (JAMA) नेटवर्क ओपन में प्रकाशित हुआ है. इसमें ब्रिटेन के लगभग 89,000 प्रतिभागियों के 13 मिलियन घंटे से अधिक के प्रकाश-संपर्क डेटा का विश्लेषण किया गया. प्रतिभागियों पर 9 वर्षों से अधिक समय तक नज़र रखी गई थी.

रिपोर्ट के अनुसार, रात में प्रकाश के संपर्क में आने वालों में, दिल का दौरा पड़ने का खतरा 47% अधिक, कोरोनरी धमनी रोग का खतरा 32% अधिक और स्ट्रोक का खतरा 28% अधिक पाया गया.

रात में रोशनी के संपर्क में रहना कैसे है हार्ट के लिए नुकसान देह?

शोधकर्ताओं ने कहा कि देर रात तक कृत्रिम रोशनी में रहना 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के वयस्कों में हृदय रोगों का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक बन सकता है. अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. डैनियल विंड्रेड ने कहा कि यह पहला बड़े पैमाने का अध्ययन है जो दिखाता है कि केवल रात में रोशनी के संपर्क में रहना भी हृदय रोग के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र जोखिम कारक हो सकता है.

उन्होंने समझाया कि रात में बार-बार तेज़ रोशनी में रहना शरीर की सर्कैडियन घड़ी (जैविक समय चक्र) को बाधित करता है, जिससे हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.

महिलाओं और युवाओं में जोखिम ज्यादा

शोध में यह भी पाया गया कि महिलाएं और युवा लोग रात में प्रकाश के हानिकारक प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं. फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सीन कैन, जो इस अध्ययन के वरिष्ठ सह-लेखक हैं, ने कहा कि महिलाएं अपने शरीर की घड़ी को बाधित करने वाले प्रकाश के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती हैं. दिलचस्प बात यह है कि रात में अधिक रोशनी में रहने वाली महिलाओं में हृदय गति रुकने का जोखिम पुरुषों के समान पाया गया, जबकि आमतौर पर महिलाओं को हृदय रोगों से कुछ प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है.

क्या करें बचाव के लिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि रात में रोशनी के संपर्क को कम करके हृदय रोगों के खतरे को घटाया जा सकता है. इसके लिए वे सुझाव देते हैं कि 

  • सोने के कमरे में ब्लैकआउट पर्दों का इस्तेमाल करें,
  • रोशनी को कम करें,
  • और सोने से पहले मोबाइल या टीवी स्क्रीन से बचें.

शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि थोड़ा अंधेरा, ज़्यादा सेहतमंद दिल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.