प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग दिखे तो घबराएं नहीं, मिसकैरेज के अलावा भी हो सकते हैं ये 9 बड़े कारण

प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने पर महिलाएं अक्सर घबरा जाती हैं. लेकिन एक्सपर्ट के अनुसार इसके कई कारण हो सकते हैं जो हमेशा गंभीर नहीं होते. आइए जानते हैं पहली दूसरी और तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग होने के प्रमुख कारण.

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Babli Rautela

प्रेग्नेंसी के दौरान अगर वेजाइना से ब्लीडिंग हो जाए तो ज्यादातर महिलाएं तुरंत घबरा जाती हैं. कई बार उन्हें लगता है कि शायद मिसकैरेज हो गया है. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि हर बार ब्लीडिंग का मतलब गर्भपात नहीं होता. मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार खासकर पहली तिमाही में हल्की ब्लीडिंग होना कई बार सामान्य भी हो सकता है. हालांकि कुछ मामलों में यह किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है. इसलिए हर स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है. आइए ट्राइमेस्टर के अनुसार जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग किन वजहों से हो सकती है.

पहली तिमाही में ब्लीडिंग के कारण

गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने यानी पहले ट्राइमेस्टर में ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं.

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी

इस स्थिति में फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय के अंदर इम्प्लांट होने की बजाय फैलोपियन ट्यूब या किसी दूसरी जगह विकसित होने लगता है. यह स्थिति खतरनाक हो सकती है और इसमें ब्लीडिंग हो सकती है.

  • इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग

गर्भधारण के लगभग दस से चौदह दिन बाद फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय की परत में स्थापित होता है. इस दौरान हल्की स्पॉटिंग या ब्लीडिंग हो सकती है जिसे इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग कहा जाता है.

  • मिसकैरेज

बीसवें सप्ताह से पहले गर्भपात होने पर भी ब्लीडिंग हो सकती है. यह पहली तिमाही में होने वाली एक आम समस्या मानी जाती है.

  • मोलर प्रेग्नेंसी

कुछ दुर्लभ मामलों में फर्टिलाइज्ड अंडाणु भ्रूण में विकसित होने की बजाय असामान्य ऊतक में बदलने लगता है. इसे मोलर प्रेग्नेंसी कहा जाता है और इसमें भी ब्लीडिंग हो सकती है.

  • सर्विक्स या प्राइवेट पार्ट की समस्याएं

सर्वाइकल इंफेक्शन सर्विक्स में सूजन या पॉलिप्स जैसी गांठें भी ब्लीडिंग का कारण बन सकती हैं. इसके अलावा प्राइवेट पार्ट में घाव या अन्य असामान्य गांठें भी इसकी वजह हो सकती हैं.

दूसरी और तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग के कारण

गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद यानी दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में ब्लीडिंग के कुछ अलग कारण हो सकते हैं.

  • कमजोर सर्विक्स

कमजोर सर्विक्स को सर्वाइकल इनसफिशिएंसी कहा जाता है. इसमें गर्भाशय ग्रीवा समय से पहले खुलने लगती है जिससे समय से पहले डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है.

  • प्लेसेंटल एब्रप्शन

यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से समय से पहले अलग हो जाता है. प्लेसेंटा ही गर्भ में पल रहे शिशु को ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाता है.

  • प्लेसेंटा एक्रेटा

इस स्थिति में प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में असामान्य रूप से गहराई तक जुड़ जाता है. इससे गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है.

  • प्लेसेंटा प्रीविया

जब प्लेसेंटा गर्भाशय ग्रीवा को ढक लेता है तो उसे प्लेसेंटा प्रीविया कहा जाता है. इस स्थिति में प्रेग्नेंसी के दौरान गंभीर ब्लीडिंग हो सकती है.

  • प्रीटर्म लेबर

अगर समय से पहले डिलीवरी शुरू हो जाती है तो हल्की ब्लीडिंग या रक्तस्राव दिखाई दे सकता है.

प्रेग्नेंसी के अंतिम दिनों में हल्की ब्लीडिंग

गर्भावस्था के आखिरी दिनों में हल्का गुलाबी या खून मिला हुआ डिस्चार्ज दिखाई दे सकता है. यह अक्सर म्यूकस के साथ आता है और कई बार लेबर शुरू होने का संकेत होता है. इसे देखकर तुरंत घबराने की जरूरत नहीं होती लेकिन डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है.

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान हल्का रक्तस्राव कई बार सामान्य भी हो सकता है. लेकिन कभी कभी यह किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है. इसलिए अगर प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग दिखाई दे तो सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाए. डॉक्टर जांच के बाद ही यह तय कर सकते हैं कि स्थिति सामान्य है या इलाज की जरूरत है. अधिकतर मामलों में सही देखभाल और समय पर इलाज से गर्भावस्था सुरक्षित रहती है और महिलाएं स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं.