नई दिल्ली: किसी दोस्त के कप से पानी पी लेना या उसकी प्लेट से खाना खा लेना आम बात मानी जाती है लेकिन यही आदत गंभीर वायरल संक्रमण का कारण बन सकती है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इससे 'किसिंग डिजीज' फैल सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में इंफेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस कहा जाता है. यह बीमारी मुख्य रूप से एपस्टीन-बार वायरस यानी EBV की वजह से होती है.
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की 90 प्रतिशत से ज्यादा आबादी जीवन में कभी न कभी EBV संक्रमण का सामना कर चुकी है. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति की लार के जरिए तेजी से फैलता है. किस करने, छींकने, खांसने, खाना या ड्रिंक शेयर करने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका की 2026 की एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इसमें 19 हजार लोगों पर अध्ययन किया गया. रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों को पहले इंफेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस हुआ था, उनमें आगे चलकर मल्टीपल स्क्लेरोसिस होने का खतरा लगभग तीन गुना ज्यादा था.
स्टडी के मुताबिक जिन लोगों को पहले मोनो हुआ था उनमें MS का खतरा 0.17 प्रतिशत पाया गया, जबकि जिन लोगों को यह संक्रमण नहीं हुआ उनमें यह जोखिम 0.07 प्रतिशत था.
रिपोर्ट में बताया गया कि यह वायरस शरीर में लंबे समय तक छिपा रह सकता है. यह ब्लड ट्रांसफ्यूजन, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, यौन संपर्क और संक्रमित वस्तुओं के इस्तेमाल से भी फैल सकता है.
इसके लक्षणों में तेज थकान, बुखार, गले में दर्द, सिरदर्द, भूख कम लगना, मांसपेशियों में कमजोरी, स्किन रैश और गर्दन की लिम्फ नोड्स में सूजन शामिल हैं.
डॉक्टर खून की जांच और एंटीबॉडी टेस्ट के जरिए इसकी पहचान करते हैं. इसका कोई विशेष इलाज नहीं है. मरीज को आराम, ज्यादा पानी और सही देखभाल की सलाह दी जाती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोगों को दूसरों के बर्तन, बोतल या खाना शेयर करने से बचना चाहिए और साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए.
आमतौर पर यह जानलेवा नहीं होती, लेकिन अगर इसकी अनदेखी की जाए तो जटिलताएं पैदा हो सकती हैं.