नदी, झील या समुद्र में नाव की सवारी हर किसी को पसंद होती है. यह अनुभव जितना रोमांच और सुकूनभरा होता है उतना ही खतरनाक भी होता है. हाल ही में बरगी डेम के पास हुए हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है. इस घटना में एक क्रूज के पलटने से कई लोगों की जान चली गई है. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों ने लोगों को भावुक कर दिया. इससे पहले मथुरा में भी नाव हादसे में कई श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. ऐसे हादसे यह सवाल उठाते हैं कि क्या हम नाव की सवारी करते समय जरूरी सावधानियां बरतते हैं. अगर नहीं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है.
अक्सर लोग उत्साह में नाव की क्षमता को नजरअंदाज कर देते हैं. हर नाव में यह लिखा होता है कि उसमें कितने लोग बैठ सकते हैं. छोटी नावों में नीचे एक सफेद पट्टी बनी होती है. अगर यह पट्टी पानी में डूबने लगे, तो समझिए नाव पर ज्यादा वजन हो गया है. जरूरत से ज्यादा लोगों के चढ़ने से नाव का बैलेंस बिगड़ सकता है और हादसे की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
कई बार हादसे अचानक बदलते मौसम की वजह से होते हैं. बरगी हादसे में भी शुरुआत में मौसम सामान्य था, लेकिन बीच नदी में तेज हवा चलने लगी. इसलिए नाव में बैठने से पहले वहां के प्रशासन या ऑपरेटर से मौसम की जानकारी जरूर लें. तेज हवा, बारिश या तूफान के संकेत मिलें तो यात्रा टाल देना ही समझदारी है.
नाव में बैठते ही सबसे पहले लाइफ जैकेट पहननी चाहिए. यह आपकी सुरक्षा का सबसे जरूरी हिस्सा है. अगर आपको तैरना आता है तब भी लाइफ जैकेट पहनना जरूरी है. कई बार अचानक संतुलन बिगड़ने पर इंसान घबरा जाता है. लाइफ जैकेट पहनते समय यह भी देख लें कि वह सही हालत में है या नहीं. एक छोटी सी जांच आपकी जान बचा सकती है.
हर जगह बोटिंग के अपने नियम होते हैं. कुछ इलाकों में गहरे पानी या तेज धारा वाले हिस्सों में जाने की मनाही होती है. ऐसे में वहां के नियमों को ध्यान से पढ़ें और उनका पालन करें. सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.
नाव या क्रूज पर चढ़ते समय यह जानना जरूरी है कि इमरजेंसी में क्या करना है. नाव में रखे लाइफ रिंग, रस्सी या अन्य बचाव उपकरण कहां हैं, इसकी जानकारी लें. साथ ही नाव चलाने वाले व्यक्ति का अनुभव भी जानना जरूरी है.
अंधेरे में नाव की सवारी करना जोखिम भरा होता है. इसलिए 'सनराइज' से पहले और 'सनसेट' के बाद बोटिंग से बचना चाहिए. कम रोशनी में दुर्घटना होने पर बचाव कार्य मुश्किल हो जाता है. दिन के समय यात्रा करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.
अगर कोई व्यक्ति पानी में डूब जाता है और बाहर निकालने के बाद बेहोश हो जाए, तो सीपीआर तकनीक उसकी जान बचा सकती है. हर व्यक्ति को बेसिक फर्स्ट एड और सीपीआर की जानकारी होनी चाहिए. यह ज्ञान किसी की जिंदगी बचाने में मददगार साबित हो सकता है.