सर्दी का मौसम शुरू होते ही बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है. कई बार बच्चे बोल नहीं पाते कि उन्हें ठंड लग रही है या नहीं. माता-पिता अक्सर बच्चे के हाथ-पैर या नाक छूकर अंदाजा लगाते हैं, लेकिन यह हमेशा सही तरीका नहीं होता. विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे की ठंड का सही पता उसके पेट या गर्दन के पीछे से लगाया जा सकता है, जो शरीर का तापमान सबसे सटीक रूप से बताता है. यदि बच्चे की गर्दन या पेट छूने पर ठंडी लगे तो समझ जाएं कि उसे ठंड लग रही है और तुरंत गर्म कपड़े पहनाएं.
वहीं, अगर ये हिस्से गर्म हैं लेकिन पसीना आ रहा है, तो ज्यादा कपड़े उतार दें ताकि बच्चा अधिक गर्मी से परेशान न हो. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों को हमेशा दो से तीन लेयर के हल्के कपड़े पहनाएं और कमरे का तापमान संतुलित रखें. इससे सर्दी-जुकाम और ठंड से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है.
सर्दियों में अक्सर बच्चों के हाथ-पैर ठंडे रहते हैं. कई बार बच्चे के हाथ-पैर ठंडे रहने कारण माता पिता परेशान होने लगते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसे ठंड लग रही है. ये शरीर के तापमान को संतुलित करने की प्राकृतिक प्रक्रिया है.
गर्दन और पेट बच्चे के शरीर का सबसे सही तापमान बताते हैं. इन्हें छूकर आसानी से ठंड या गर्मी का अंदाजा लगाया जा सकता है.
बच्चों को ज्यादा कपड़े पहनाने से शरीर में पसीना और जलन हो सकती है. इससे उन्हें सर्दी की बजाय गर्मी लग सकती है.
कमरे का तापमान 22 से 24 डिग्री के बीच रखना आदर्श माना जाता है. बहुत ठंडा या बहुत गर्म माहौल दोनों ही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं.
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