नई दिल्ली: देशभर में भीषण गर्मी पड़ रही है और हर साल गर्मी से जुड़ी बीमारियां कई लोगों की जान ले लेती हैं. डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक के लक्षण अक्सर एक जैसे लगते हैं, जिससे लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं. लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है. डिहाइड्रेशन पानी की कमी से होता है, जबकि हीटस्ट्रोक में शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं रह पाता. सही समय पर अंतर पहचानना जान बचाने के लिए बहुत जरूरी है.
चिकित्सकों के अनुसार अगर समय रहते संकेतों को समझ लिया जाए तो बड़ी मुसीबत से बचा जा सकता है. प्यास, थकान, त्वचा की स्थिति और मानसिक बदलाव जैसे लक्षणों पर ध्यान दें. हीटस्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जबकि डिहाइड्रेशन को घरेलू उपायों से भी संभाला जा सकता है. इन 6 महत्वपूर्ण संकेतों को जानिए.
डिहाइड्रेशन में शरीर का तापमान सामान्य या थोड़ा बढ़ा रहता है. वहीं हीटस्ट्रोक में तापमान तेजी से 40°C (104°F) से ऊपर चला जाता है. यह शरीर के कूलिंग सिस्टम के फेल होने का संकेत है. तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं और डॉक्टर से मदद लें.
डिहाइड्रेशन में बहुत ज्यादा प्यास लगती है, मुंह सूखता है और लार चिपचिपी हो जाती है. हीटस्ट्रोक में भी प्यास लग सकती है लेकिन साथ में भ्रम, कमजोरी और चक्कर आना आम है. प्यास के साथ मानसिक अस्वस्थता हो तो इसे गंभीरता से लें.
डिहाइड्रेशन से चिड़चिड़ापन, थकान या सिरदर्द होता है. लेकिन हीटस्ट्रोक में भ्रम, दिशा भूलना, बोलने में दिक्कत या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण दिखते हैं. मानसिक स्थिति में अचानक बदलाव गर्मी की इमरजेंसी का संकेत है.
डिहाइड्रेशन में त्वचा सूखी और बेजान हो जाती है. हीटस्ट्रोक में त्वचा गर्म, लाल और सूखी हो जाती है, कभी-कभी पहले चिपचिपी भी लग सकती है. त्वचा का असामान्य होना गंभीर चेतावनी है.
डिहाइड्रेशन में दिल की धड़कन तेज हो जाती है. हीटस्ट्रोक में धड़कन बहुत तेज होती है और सांस उथली या मुश्किल से आती है. ये लक्षण तुरंत अस्पताल जाने का संकेत देते हैं.
नोट: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है. इंडिया डेली इसकी पुष्टी नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरुर लें.