नई दिल्ली: सफेद बालों को रंगने के लिए हेयर डाई का इस्तेमाल आजकल आम हो गया है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा रहता है कि क्या इससे लिवर को नुकसान हो सकता है. हाल ही में इस विषय पर एक्सपर्ट्स ने स्थिति साफ की है और बताया है कि आम तौर पर हेयर डाई का लिवर पर गंभीर असर पड़ने के ठोस सबूत नहीं हैं.
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार नियमित रूप से कॉस्मेटिक हेयर डाई इस्तेमाल करने से सामान्य लोगों में लिवर की गंभीर बीमारी होने का कोई पुख्ता क्लिनिकल प्रमाण नहीं मिला है. इसका मुख्य कारण यह है कि बाजार में मिलने वाली ज्यादातर हेयर डाई रेगुलेटेड होती हैं और स्कैल्प के जरिए शरीर में इनका अवशोषण बहुत कम होता है यानी इन केमिकल्स की मात्रा इतनी नहीं होती कि वे ब्लडस्ट्रीम तक पहुंचकर लिवर को नुकसान पहुंचा सकें.
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता. कुछ दुर्लभ मामलों में लिवर डैमेज की शिकायत सामने आई है, खासकर जब हेयर डाई में पैरा-फिनाइलिन डायमीन जैसे केमिकल मौजूद हों लेकिन ऐसे मामले बेहद कम और व्यक्ति विशेष की प्रतिक्रिया पर आधारित होते हैं. यह किसी तय पैटर्न या डोज पर निर्भर नहीं करते.
डॉक्टरों का कहना है कि हेयर डाई के कारण सबसे आम समस्या स्किन एलर्जी होती है. कई लोगों को खुजली, लालिमा या जलन जैसी शिकायतें हो सकती हैं, जो आम तौर पर गंभीर नहीं होतीं. लेकिन अगर स्कैल्प पर घाव हो या डाई के केमिकल्स अधिक मात्रा में शरीर में प्रवेश कर जाएं, तो जोखिम बढ़ सकता है.
कुछ मामलों में हेयर डाई और लिवर से जुड़ी समस्याओं के बीच संबंध देखा गया है लेकिन उनमें अन्य कारण भी शामिल रहे हैं. जैसे लंबे समय तक बार-बार डाई का इस्तेमाल करना, पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं या अन्य हानिकारक आदतें.
खासकर स्मोकिंग को लिवर के लिए बड़ा खतरा माना गया है. स्मोकिंग शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ाती है, जिससे लिवर डिजीज का खतरा बढ़ सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार लिवर को सुरक्षित रखने के लिए हेयर डाई छोड़ने से ज्यादा जरूरी है कि लोग स्मोकिंग जैसी आदतों से दूरी बनाएं. साथ ही हेयर डाई का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना भी जरूरी है.
डॉक्टर सलाह देते हैं कि हमेशा भरोसेमंद ब्रांड की डाई का इस्तेमाल करें और हर बार उपयोग से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. इसके अलावा, कटे-फटे या संक्रमित स्कैल्प पर डाई लगाने से बचना चाहिए.