Study on abusing people: गाली देना एक ऐसा व्यवहार है जिसे अक्सर नकारात्मक या असभ्य समझा जाता है, लेकिन यह भावनात्मक तनाव से राहत देने का एक प्रभावी तरीका भी हो सकता है.
गाली देने के बाद इंसान के रिलैक्स महसूस करने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और शारीरिक कारण होते हैं.
गाली देना एक प्रकार का भावनात्मक विस्फोट है. जब हम तनाव, गुस्सा या निराशा में होते हैं, तो हमारे दिमाग में संचित नकारात्मक भावनाएं बाहर निकलने का रास्ता खोजती हैं. गाली देने से ये भावनाएं शब्दों के माध्यम से प्रकट हो जाती हैं, जिससे व्यक्ति को हल्कापन महसूस होता है.
गाली देने से शरीर में एड्रेनालिन जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं. यह हार्मोन 'फाइट या फ्लाइट' प्रतिक्रिया को ट्रिगर करता है, जिससे व्यक्ति को अपनी ताकत और आत्मविश्वास का अनुभव होता है. जब एड्रेनालिन का प्रभाव कम होता है, तो व्यक्ति को राहत और शांति का अनुभव होता है.
कई शोधों से पता चला है कि गाली देना शारीरिक दर्द को सहने की क्षमता को बढ़ा सकता है. यह मस्तिष्क में एंडॉर्फिन, यानी 'फील-गुड' हार्मोन के स्राव को बढ़ाता है, जो दर्द को कम करने में मदद करता है और व्यक्ति को बेहतर महसूस कराता है.
कुछ परिस्थितियों में गाली देना व्यक्ति को अपनी भावनाओं को प्रकट करने और सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का तरीका भी बन जाता है. उदाहरण के लिए, दोस्तों के बीच मजाकिया गाली का उपयोग संबंधों में निकटता और आपसी समझ को बढ़ा सकता है.
हालांकि गाली देने से अस्थायी राहत मिलती है, लेकिन इसे आदत बनाना सही नहीं है. बार-बार गाली देने से यह दूसरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और आपके संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है.
गाली देने के बाद रिलैक्स महसूस करना एक सामान्य मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रतिक्रिया है. यह तनाव और दर्द से राहत प्रदान करता है, लेकिन इसे सटीक रूप से संभालना आवश्यक है. भावनाओं को नियंत्रित करने और स्वस्थ तरीकों से तनाव को प्रबंधित करने की आदत डालना दीर्घकालिक रूप से अधिक फायदेमंद होता है.