Success Story: सफलता की कहानी हमेशा बड़े संस्थान या शानदार शुरुआत से नहीं बनती. देवश्री भारतीया का सफर इसका उदाहरण है. उनके पिता की मासिक कमाई करीब 6 हजार रुपये थी और उनकी पढ़ाई के लिए परिवार को कर्ज लेना पड़ा. सफलता की कहानी तब और खास हो जाती है, जब मुश्किलों के बावजूद इंसान आगे बढ़ने की कोशिश जारी रखे. देवश्री भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की प्रवेश परीक्षा में सफल नहीं हो सकीं, फिर भी निजी कॉलेज से पढ़ाई की और 30 हजार रुपये मासिक वेतन से अपना करियर शुरू किया.
देवश्री का परिवार सीमित आमदनी वाला था. रिपोर्ट के अनुसार, उनके पिता करीब 6 हजार रुपये प्रति माह कमाते थे. ऐसे में उच्च शिक्षा का खर्च परिवार के लिए बड़ी चुनौती था. देवश्री की पढ़ाई जारी रखने के लिए परिवार को कर्ज लेना पड़ा. यह फैसला उस समय आर्थिक रूप से जोखिम भरा था, लेकिन परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई के बाद बेटी बेहतर भविष्य बनाएगी.
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान को देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में माना जाता है. देवश्री यहां प्रवेश हासिल नहीं कर सकीं. लेकिन उन्होंने इसे अपनी मंजिल की रुकावट नहीं बनने दिया. उन्होंने निजी कॉलेज से पढ़ाई पूरी की और नौकरी की तलाश शुरू कर दी. यहीं से उनके करियर की शुरुआत हुई.
देवश्री ने करीब 30 हजार रुपये महीने के वेतन से नौकरी शुरू की. आज उनकी कमाई करोड़ों रुपये में बताई जाती है, इसलिए शुरुआती नौकरी उनके सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती है. उन्होंने पहली नौकरी को अंतिम मंजिल नहीं समझा. अपनी तकनीकी जानकारी बढ़ाने, नई चीजें सीखने और बेहतर अवसर तलाशने पर लगातार ध्यान दिया. इसी सोच ने धीरे धीरे उनके करियर की दिशा बदल दी.
देवश्री की कहानी में सबसे खास बात यह है कि उन्होंने कॉलेज के नाम को अपनी सफलता की सीमा नहीं बनने दिया. उन्होंने अपने कौशल और अनुभव को मजबूत करने पर लगातार काम किया. समय के साथ उनकी योग्यता और अनुभव बढ़ता गया. इससे उन्हें बड़ी कंपनियों में काम करने के अवसर मिले. उनका सफर दिखाता है कि अच्छी नौकरी पाने में केवल कॉलेज की पहचान ही निर्णायक नहीं होती.
लगातार मेहनत और तकनीकी कौशल विकसित करने के बाद देवश्री को गूगल में काम करने का अवसर मिला. इसके बाद उनके करियर ने एक और बड़ी छलांग लगाई. वह वॉलमार्ट से भी जुड़ीं, जहां उन्होंने वरिष्ठ सॉफ्टवेयर अभियंता के रूप में काम किया. निजी कॉलेज से पढ़ाई और 30 हजार रुपये की शुरुआती नौकरी के बाद दुनिया की बड़ी कंपनियों तक पहुंचना उनके सॉफ्टवेयर करियर की बड़ी उपलब्धि है.
देवश्री ने अमेरिका में छात्रवृत्ति के जरिए मास्टर डिग्री भी हासिल की. नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखकर उन्होंने अपनी योग्यता को और मजबूत किया. उनका सफर बताता है कि करियर में आगे बढ़ने के लिए लगातार सीखते रहना कितना जरूरी है. उन्होंने एक नौकरी मिलने के बाद रुकने के बजाय अपनी शिक्षा और कौशल पर लगातार काम किया.
आज देवश्री अमेरिका में काम कर रही हैं और उनकी सालाना कमाई करीब 2 करोड़ रुपये बताई जाती है. उन्होंने अपनी पहली कार भी खरीदी, जो टेस्ला बताई जाती है. हालांकि, उनकी उपलब्धि को केवल करोड़ों की कमाई या अमेरिका में नौकरी तक सीमित नहीं किया जा सकता. जिस परिवार की मासिक आय कभी करीब 6 हजार रुपये थी, उसी परिवार की बेटी ने अपनी मेहनत से विदेश में नौकरी और मजबूत करियर बनाया.
देवश्री की कहानी का भावुक पहलू तब सामने आया, जब उनके माता पिता वॉलमार्ट के अमेरिकी कार्यालय पहुंचे. बेटी के कार्यस्थल पर पहुंचना उनके लिए केवल एक यात्रा नहीं थी. उनके सामने बेटी की वर्षों की मेहनत और परिवार के पुराने संघर्षों का नतीजा था. जिस बेटी की पढ़ाई के लिए परिवार को कर्ज लेना पड़ा था, वही बेटी अब अमेरिका की बड़ी कंपनी में काम कर रही थी.
देवश्री की प्रेरणादायक कहानी यह संदेश देती है कि शुरुआत कितनी भी छोटी क्यों न हो, लगातार सीखने, मेहनत करने और बेहतर अवसर तलाशने की आदत इंसान को बहुत आगे ले जा सकती है. सफलता का रास्ता हमेशा प्रतिष्ठित कॉलेज से होकर ही गुजरे, यह जरूरी नहीं है.