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Success Story: 26 दिन की नवजात बेटी गोद में, दर्द भरी हालत में इंटरव्यू देकर DSP बनीं वर्षा पटेल

एमपीपीएससी सफलता की मिसाल वर्षा पटेल ने प्रसव के 26 दिन बाद बेटी को गोद में लेकर इंटरव्यू दिया. कठिन हालात के बावजूद वह पुलिस उपाधीक्षक बनीं और महिलाओं के लिए बड़ी प्रेरणा बनीं.

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Edited By: Reepu Kumari
Success Story: 26 दिन की नवजात बेटी गोद में, दर्द भरी हालत में इंटरव्यू देकर DSP बनीं वर्षा पटेल
Courtesy: Pinterest

Success Story: मध्य प्रदेश की वर्षा पटेल ने एमपीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर पुलिस उपाधीक्षक का पद पाया. उनकी कहानी खास है, क्योंकि उन्होंने प्रसव के 26 दिन बाद अपनी नवजात बेटी को गोद में लेकर इंटरव्यू दिया. सर्जरी के बाद उन्हें चलने और बैठने में परेशानी थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. परिवार की जिम्मेदारियों और वर्षों की तैयारी के बीच वर्षा ने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा और महिला अभ्यर्थियों के लिए एक नई मिसाल कायम की.

गांव से शुरू हुआ सफलता का सफर

वर्षा पटेल मध्य प्रदेश के मैहर के पास स्थित भरेवा गांव की रहने वाली हैं. उनकी पढ़ाई और स्नातक की शिक्षा दमोह में हुई. पढ़ाई के शुरुआती दौर में ही परिवार में कई मुश्किलें आईं. उनके पिता गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसका असर उनके शुरुआती प्रयासों पर भी पड़ा. शादी के बाद भी उनकी जिम्मेदारियां बढ़ गईं. वर्षा की शादी वर्ष 2017 में हुई थी. ससुराल में भी उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. उनकी सास गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं और कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान उनका निधन हो गया.

पति ने बढ़ाया हौसला

शादी के बाद वर्षा के पति ने उनकी पढ़ाई और क्षमता को समझते हुए उन्हें मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की तैयारी के लिए प्रोत्साहित किया. परिवार की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई जारी रखना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत की. वर्षा ने कई बार परीक्षा और इंटरव्यू की चुनौती का सामना किया. असफलताओं को उन्होंने रुकावट नहीं बनने दिया, बल्कि हर प्रयास से अपनी तैयारी को बेहतर किया.

कई प्रयासों के बाद हासिल की बड़ी कामयाबी

वर्षा पटेल ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कई प्रयास किए. उन्होंने पांच मुख्य परीक्षाएं और तीन इंटरव्यू दिए. लगातार प्रयास और अनुभव के बाद उन्हें आखिरकार बड़ी सफलता मिली. परीक्षा में महिला वर्ग में प्रथम स्थान हासिल कर उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक का पद प्राप्त किया. उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने निजी और पारिवारिक चुनौतियों के बीच अपनी तैयारी को जारी रखा.

प्रसव के 26 दिन बाद दिया इंटरव्यू

वर्षा की सफलता की सबसे प्रेरक बात उनका इंटरव्यू है. परीक्षा पास करने के बाद उनके प्रसव का समय भी नजदीक था. प्रसव के बाद शल्यक्रिया के कारण उन्हें चलने और बैठने में काफी परेशानी हो रही थी.

इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू से पीछे हटने का फैसला नहीं किया. जब वह आयोग पहुंचीं, तब उनकी बेटी महज 26 दिन की थी. वह अपनी नवजात बेटी को गोद में लेकर इंटरव्यू देने पहुंचीं.

उनके सामने उस समय दो बड़ी चुनौतियां 

प्रसव के बाद शरीर को आराम की जरूरत थी.
26 दिन की बच्ची को अकेला छोड़ना संभव नहीं था.

वर्षा ने दोनों परिस्थितियों के बीच रास्ता निकाला और बेटी को अपने साथ लेकर इंटरव्यू पूरा किया.

महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

वर्षा पटेल की कहानी बताती है कि पारिवारिक जिम्मेदारियां और मुश्किल परिस्थितियां सपनों को खत्म नहीं करतीं. सही लक्ष्य, लगातार मेहनत और परिवार के सहयोग से कठिन रास्ता भी पार किया जा सकता है. वर्षा का संदेश साफ है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए. उनकी सफलता उन महिलाओं के लिए खास प्रेरणा है, जो परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाते हुए अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं.