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Success Story: उजड़ा सिंदूर, कोख हुई सूनी, फिर भी नहीं टूटा हौसला… आंख पर पट्टी बांधकर परीक्षा दी; RAS क्रैक कर बनीं अधिकारी

RAS अधिकारी रोहिणी गुर्जर ने पति, दादी सास और बेटी को खोने के बाद भी हिम्मत नहीं छोड़ी. आंख में चोट के बावजूद पट्टी बांधकर परीक्षा दी और सफलता हासिल की.

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Edited By: Reepu Kumari
Success Story: उजड़ा सिंदूर, कोख हुई सूनी, फिर भी नहीं टूटा हौसला… आंख पर पट्टी बांधकर परीक्षा दी; RAS क्रैक कर बनीं अधिकारी
Courtesy: ChatGPT

अजमेर: RAS अधिकारी रोहिणी गुर्जर की सफलता की कहानी उन लोगों के लिए मिसाल है, जो मुश्किल हालात में हिम्मत हार जाते हैं. अजमेर के नारेली गांव की रहने वाली रोहिणी ने शादी के करीब दो दशक बाद दोबारा पढ़ाई शुरू की और राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी बनने का लक्ष्य तय किया. तैयारी के दौरान पहले पति, फिर दादी सास और परीक्षा से कुछ दिन पहले दस वर्षीय बेटी को खो दिया. हादसे में आंख घायल होने के बाद भी उन्होंने परीक्षा दी और सफलता हासिल की.

शादी के बाद दोबारा शुरू की पढ़ाई

रोहिणी गुर्जर ने वर्ष 2003 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद उनकी शादी हो गई. शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उनकी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन अधिकारी बनने का सपना उनके मन में बना रहा. करीब 20 साल बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की. इस बार उनका लक्ष्य साफ था. वह राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास करके अधिकारी बनना चाहती थीं. पति के साथ उन्होंने परीक्षा की तैयारी शुरू की, लेकिन इसी दौरान उनकी जिंदगी में बड़ा दुख आ गया.

तैयारी के बीच पति का निधन

RAS की तैयारी के दौरान ही रोहिणी के पति का निधन हो गया. इस घटना ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया. इसके बावजूद परिवार ने उन्हें संभाला और दोबारा आगे बढ़ने के लिए हिम्मत दी. रोहिणी ने खुद को संभाला और परीक्षा की तैयारी जारी रखी. वह अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटीं और पढ़ाई में जुटी रहीं.

दादी सास ने दिया सहारा, फिर उनका भी निधन

पति के बाद दादी सास ने रोहिणी को भावनात्मक सहारा दिया. लेकिन किस्मत ने यहां भी उनका साथ नहीं दिया. RAS प्रारंभिक परीक्षा के दौरान दादी सास का भी निधन हो गया. एक के बाद एक दुखों के बावजूद रोहिणी ने हार नहीं मानी. मायके और ससुराल दोनों पक्षों से मिले सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी.

दस साल की बेटी को भी खो दिया

रोहिणी ने RAS प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी. इसके बाद वह अपनी दस वर्षीय बेटी की देखभाल के साथ मुख्य परीक्षा की तैयारी करने लगीं. लेकिन मुख्य परीक्षा से करीब एक सप्ताह पहले बेटी का निधन हो गया. यह सदमा इतना बड़ा था कि रोहिणी ने परीक्षा में शामिल होने से मना कर दिया. इस मुश्किल समय में उनकी ननद ने उन्हें संभाला और परीक्षा देने के लिए प्रोत्साहित किया.

परीक्षा से दो दिन पहले हुआ हादसा

रोहिणी ने परिवार के समझाने पर मुख्य परीक्षा देने का फैसला किया. लेकिन परीक्षा से ठीक दो दिन पहले वह खुद एक हादसे का शिकार हो गईं. इस दुर्घटना में उनकी एक आंख में गंभीर चोट लगी. ऐसी स्थिति में परीक्षा देना किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद मुश्किल होता, लेकिन रोहिणी ने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा. उन्होंने आंख पर पट्टी बांधी और परीक्षा केंद्र पहुंचीं.

एक आंख से दी परीक्षा, हासिल की बड़ी सफलता

रोहिणी ने एक आंख पर पट्टी बांधकर RAS मुख्य परीक्षा दी. परीक्षा के दौरान उनकी एक ही आंख खुली थी, फिर भी उन्होंने अपना पूरा ध्यान उत्तर लिखने पर लगाया. उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई. विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मुख्य परीक्षा पास कर ली. इसके बाद साक्षात्कार में भी अच्छे अंक हासिल किए और RAS भर्ती 2023 में उनका चयन हो गया. इस तरह रोहिणी गुर्जर राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी बनीं. उन्होंने आगे भी अपनी पढ़ाई और प्रयास जारी रखे और RAS भर्ती 2024 के साक्षात्कार में भी शामिल हुईं.

रोहिणी की कहानी देती है बड़ा संदेश

रोहिणी गुर्जर की सफलता की कहानी बताती है कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादे इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देते हैं. उनकी RAS सफलता केवल परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि दुख, जिम्मेदारियों और शारीरिक परेशानी के बीच अपने लक्ष्य पर टिके रहने की मिसाल है. यही वजह है कि उनकी कहानी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है.