अब बदल चुका है जॉब मार्केट, महंगे डिग्री और कॉलेज नहीं सिर्फ इन स्किल्स से मिल रही लाखों की नौकरी

2026 में जॉब मार्केट में स्किल बेस्ड हायरिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है. कई क्षेत्रों में कंपनियां डिग्री से ज्यादा प्रैक्टिकल स्किल्स, प्रोजेक्ट और काम के अनुभव को महत्व दे रही हैं.

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Km Jaya

नई दिल्ली: साल 2026 में नौकरी का बाजार तेजी से बदल रहा है. अब कई कंपनियां उम्मीदवार की डिग्री से ज्यादा उसकी असली काबिलियत और काम करने की क्षमता को महत्व दे रही हैं. यही वजह है कि स्किल बेस्ड हायरिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है. तकनीक, मार्केटिंग, डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में उम्मीदवारों के लिए डिग्री से ज्यादा प्रैक्टिकल स्किल्स महत्वपूर्ण होती जा रही हैं.

LinkedIn के Workforce Confidence Index के अनुसार, भारत में स्किल्स के आधार पर भर्ती करने से कंपनियों के लिए संभावित टैलेंट पूल 11.4 गुना तक बढ़ सकता है. वहीं बिना डिग्री की शर्त वाले पेड जॉब पोस्ट की हिस्सेदारी 2020 में 22 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 26 प्रतिशत हो गई थी. इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां धीरे धीरे पारंपरिक योग्यता की शर्तों से आगे बढ़ रही हैं.

World Economic Forum की Future of Jobs Report 2025 के मुताबिक, 2030 तक कर्मचारियों की मौजूदा मुख्य स्किल्स में करीब 39 प्रतिशत बदलाव आने की संभावना है. AI और बिग डेटा, नेटवर्क और साइबर सिक्योरिटी तथा टेक्नोलॉजिकल लिटरेसी जैसी स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है.


किन स्किल्स की बढ़ रही मांग?

कोडिंग, डेटा एनालिसिस, डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सिक्योरिटी, AI टूल्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़ी अन्य स्किल्स युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल रही हैं. कई लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट के जरिए इन स्किल्स को सीख रहे हैं. इसके लिए महंगे कॉलेज या बड़े सर्टिफिकेट पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है.

कंपनियां क्या देखना चाहती हैं?

हालांकि सिर्फ स्किल सीख लेना ही काफी नहीं है. बिना डिग्री नौकरी पाने के लिए उम्मीदवार को अपनी काबिलियत का सबूत भी देना होता है. इसके लिए GitHub, LinkedIn और पोर्टफोलियो वेबसाइट पर अपने प्रोजेक्ट और काम दिखाना उपयोगी हो सकता है. कंपनियां यह देखना चाहती हैं कि उम्मीदवार ने वास्तविक समस्या को हल करके क्या दिखाया है.

क्या कॉलेज की जरूरत खत्म हो जाएगी?

स्किल बेस्ड हायरिंग बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि कॉलेजों की जरूरत खत्म हो जाएगी. मेडिकल, कानून, शिक्षा और कई अन्य पेशों में औपचारिक डिग्री और लाइसेंस जरूरी रहेंगे. हालांकि सामान्य कॉर्पोरेट और टेक भूमिकाओं में कंपनियां उम्मीदवार के कौशल, अनुभव और समस्या हल करने की क्षमता पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं.

ऐसे में आने वाले समय में डिग्री के साथ स्किल्स का महत्व और बढ़ेगा. युवाओं के लिए सबसे जरूरी बात यह होगी कि वे लगातार नई तकनीक सीखें और अपने काम का मजबूत पोर्टफोलियो तैयार करें.