Inspiring Journey: गरीबी में चराईं भैंस... जंगल में की पढ़ाई, अब बने डिप्टी कलेक्टर; विजय की कहानी करेगी प्रेरित

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के विजय कुमार देहारिया की कहानी संघर्ष, मेहनत और मजबूत इरादों की मिसाल है.

Grok
Reepu Kumari

Vijay Dehariya Inspiring Journey: हर किसी की जिंदगी में मुश्किलें आती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं मुश्किलों को अपनी ताकत बना लेते हैं. मध्य प्रदेश के विजय कुमार देहारिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. सिवनी जिले के एक छोटे से गांव में पले-बढ़े विजय ने बचपन से ही आर्थिक परेशानियों का सामना किया. परिवार की मदद के लिए उन्हें पशुपालन करना और भैंस चराने जाना पड़ता था. इन जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने पढ़ाई को अपने भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद बनाए रखा.

ट्यूशन पढ़ाकर उठाया पढ़ाई का खर्च

विजय ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के माहौल में हासिल की. आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा को लेकर मन में डर था, लेकिन उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया और तहसील स्तर पर टॉपर बने. इसके बाद उन्होंने उत्कृष्ट विद्यालय, सिवनी से आगे की पढ़ाई की. स्कूल पहुंचने के लिए वह साइकिल का इस्तेमाल करते थे. आर्थिक परेशानियों के बीच विजय ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया. इससे उन्हें अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने में मदद मिली. साथ ही, दूसरों को पढ़ाने से उनकी खुद की समझ और आत्मविश्वास भी बढ़ा.

फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी मिली

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद विजय ने इंदौर की एक निजी कंपनी में सुपरवाइजर के तौर पर काम किया. इसके बाद वह फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी में गए. नौकरी के दौरान भी उनकी नजर अपने बड़े लक्ष्य पर बनी रही. कठिन परिस्थितियों और वेतन से जुड़ी परेशानियों के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी. जंगल में ड्यूटी करते समय भी वह किताबें अपने साथ रखते और समय मिलते ही पढ़ाई में जुट जाते थे.


विजय का सफर यहीं नहीं रुका. उन्होंने रक्षा मंत्रालय में मटेरियल असिस्टेंट के पद पर भी काम किया. अलग-अलग नौकरियों और जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने सिविल सेवा में जाने की इच्छा को जिंदा रखा. 

छह बार प्रीलिम्स में असफलता

विजय की सिविल सेवा की तैयारी में कई उतार-चढ़ाव आए. उन्हें छह बार प्रारंभिक परीक्षा, पांच बार मुख्य परीक्षा और तीन बार इंटरव्यू का सामना करना पड़ा. इन कोशिशों के दौरान असफलताएं भी मिलीं और लोगों के ताने भी सुनने पड़े. इसके बावजूद उन्होंने तैयारी छोड़ने के बजाय अपनी कमियों को समझने और आगे बेहतर प्रदर्शन करने पर ध्यान दिया. आखिरकार, साल 2018 की मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC परीक्षा में उनकी मेहनत रंग लाई. विजय ने 38वीं रैंक हासिल की और डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए. 

गलतियों से सीखें और लक्ष्य पर टिके रहें

डिप्टी कलेक्टर बनने के बाद भी विजय अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं. गांव जाने पर वह पुराने दोस्तों और स्थानीय लोगों से मिलते हैं. युवाओं को उनका संदेश है कि असफलता से घबराने के बजाय अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और उनसे सीखना चाहिए. नकारात्मक बातों से प्रभावित होने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान देना जरूरी है.