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Success Story: रेल पटरियों की मरम्मत से IPS की कुर्सी तक, प्रह्लाद मीणा 3 बार हुए असफल; फिर बिना कोचिंग लिख दी सफलता की कहानी

राजस्थान के दौसा जिले के गरीब किसान परिवार में जन्मे प्रह्लाद मीणा ने अभावों को अपनी ताकत बनाया. रेलवे में गैंगमैन की नौकरी करते हुए उन्होंने 8 से 9 घंटे की ड्यूटी के साथ बिना किसी कोचिंग UPSC की तैयारी की.

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Edited By: Reepu Kumari
Success Story: रेल पटरियों की मरम्मत से IPS की कुर्सी तक, प्रह्लाद मीणा 3 बार हुए असफल; फिर बिना कोचिंग लिख दी सफलता की कहानी
Courtesy: Grok

दौसा: सफलता की कहानियां अक्सर बड़े शहरों और महंगे संसाधनों से जुड़ी दिखाई देती हैं, लेकिन प्रह्लाद मीणा की यात्रा इस सोच को पूरी तरह बदल देती है. राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने गरीबी, कठिन नौकरी और लगातार असफलताओं के बीच ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसने लाखों युवाओं को नई उम्मीद दी.

रेलवे में पटरियों की मरम्मत करने वाले एक साधारण गैंगमैन से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल है. बिना कोचिंग, सीमित साधनों और नौकरी की जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर अपने सपने को सच कर दिखाया.

दो बीघा जमीन से शुरू हुई संघर्ष की कहानी

प्रह्लाद मीणा का जन्म राजस्थान के दौसा जिले के एक गरीब किसान परिवार में हुआ. परिवार के पास केवल दो बीघा जमीन थी, जिससे घर का खर्च चलाना भी आसान नहीं था. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा. बचपन में वे स्कूल जाने के साथ मवेशी भी चराते थे. यही संघर्ष उन्हें समय की कीमत और मेहनत का महत्व सिखाता रहा. सीमित संसाधनों में भी उन्होंने शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया.

रेलवे की नौकरी मिली, लेकिन सपना नहीं बदला

गांव के एक युवक से प्रेरित होकर प्रह्लाद ने रेलवे में गैंगमैन की नौकरी चुनी. इस पद पर उनका काम रेल पटरियों का रखरखाव और मरम्मत करना था. यह उनकी पहली सरकारी नौकरी थी और परिवार के लिए आर्थिक सहारा भी. भुवनेश्वर में नौकरी करते हुए भी उन्होंने अपने बड़े लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा. उन्होंने नौकरी को मंजिल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की पहली सीढ़ी माना और उच्च प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना जीवित रखा.

सुबह 4 बजे से शुरू होती थी UPSC की तैयारी

प्रह्लाद ने बाद में दिल्ली में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) के रूप में कार्य करते हुए UPSC की तैयारी शुरू की. उनके पास न कोचिंग थी और न ही महंगे अध्ययन संसाधन, लेकिन समय प्रबंधन उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया. वे रोज सुबह चार बजे उठकर पढ़ाई करते थे. ऑफिस के लंच ब्रेक में किताबें पढ़ना और मेट्रो यात्रा के दौरान अखबार पढ़ना उनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा था. 8–9 घंटे की ड्यूटी के साथ यही अनुशासन उनकी तैयारी की नींव बना.

तीन असफलताओं के बाद भी नहीं छोड़ा सपना

UPSC का सफर उनके लिए आसान नहीं रहा. शुरुआती तीन प्रयासों में उन्हें असफलता मिली और कई लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों का गंभीर विश्लेषण किया. निबंध लेखन और वैकल्पिक विषय पर उन्होंने विशेष मेहनत की. नेट जेआरएफ की तैयारी से हिंदी साहित्य में उनकी पकड़ मजबूत हुई, जिसने आगे की तैयारी को नई दिशा दी और आत्मविश्वास बनाए रखा.

2017 में उसी राज्य में बने IPS, जहां थे गैंगमैन

साल 2017 में प्रह्लाद मीणा का वर्षों पुराना सपना आखिरकार पूरा हुआ और वे भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बने. खास बात यह रही कि जिस ओडिशा में उन्होंने गैंगमैन के रूप में नौकरी की थी, वहीं आगे चलकर IPS अधिकारी के रूप में सेवा का अवसर मिला. आज प्रह्लाद युवाओं को सलाह देते हैं कि बहुत अधिक किताबें पढ़ने के बजाय सीमित और भरोसेमंद सामग्री को बार बार पढ़ें. उनका मानना है कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर मेहनत है. उनकी कहानी हर उस अभ्यर्थी के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को सच करना चाहता है.