Asian Games 2026

Inspiring Journey: ‘तुमसे कुछ नहीं होगा...’, ताने सुनती रहीं करुणा; फिर एक दिन सरकारी नौकरी से दिया जोरदार जवाब

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की करुणा मिश्रा की कहानी मुश्किल हालात में हार न मानने की मिसाल है. पति के अचानक गुमशुदा होने के बाद छोटी उम्र में बच्चे की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई.

Pinterest
Reepu Kumari

Inspiring Journey: कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जिनमें मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं लेतीं, लेकिन इंसान रुकने का नाम नहीं लेता. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की करुणा मिश्रा की जिंदगी भी ऐसे ही संघर्षों से गुजरी. पति के अचानक गुमशुदा होने के बाद कम उम्र में बच्चे की जिम्मेदारी उनके सामने थी. ऊपर से समाज के ताने और भविष्य को लेकर उठते सवाल लगातार परेशान करते रहे. फिर भी उन्होंने परिस्थितियों के सामने झुकने के बजाय अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला किया.

करुणा ने जोशटॉक के एक वीडियो में अपने संघर्ष की कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि मुश्किल समय में लोगों ने उनसे कहा कि ‘तुमसे कुछ नहीं होगा’. लेकिन इन बातों को उन्होंने अपनी मंजिल के रास्ते में दीवार नहीं बनने दिया. दिन में नौकरी करने के साथ उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. हालात तब और कठिन हो गए, जब उनकी आंखों में बीमारी हो गई और नजर धुंधली होने लगी. इसके बावजूद उन्होंने तैयारी से दूरी नहीं बनाई.

मुश्किलों के बीच खुद को संभाला

करुणा के लिए जिंदगी का यह दौर आसान नहीं था. 25-26 साल की उम्र में एक छोटे बच्चे की जिम्मेदारी उनके ऊपर थी. पति के अचानक गुमशुदा होने के बाद निजी जिंदगी में आए संकट के साथ उन्हें समाज के सवालों और तानों का भी सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने अपने भविष्य को लेकर उम्मीद नहीं छोड़ी. उन्होंने महज 500 रुपये की नौकरी से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी जिंदगी को संभालते हुए आगे बढ़ने की कोशिश जारी रखी.


रात की पढ़ाई बनी कामयाबी की राह

दिनभर नौकरी करने के बाद करुणा रात में बच्चे को सुलाकर पढ़ाई करती थीं. इसी दौरान उनकी आंखों में बीमारी हो गई. डॉक्टर की सलाह और धुंधली होती नजर के बीच पढ़ाई करना उनके लिए और मुश्किल हो गया. बताया गया कि उन्होंने एक आंख बंद करके भी घंटों पढ़ाई की. शारीरिक परेशानी और जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी. उनके लिए पढ़ाई सिर्फ परीक्षा पास करने का जरिया नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी को बदलने का रास्ता बन चुकी थी.

मेहनत का मिला सरकारी नौकरी वाला नतीजा

लंबे संघर्ष के बाद करुणा ने सरकारी शिक्षक की परीक्षा पास कर ली. उनकी मेहनत ने उन्हें सरकारी नौकरी तक पहुंचाया और आज वह एक सरकारी इंटर कॉलेज में हिंदी शिक्षिका के तौर पर कार्यरत हैं. कभी जिन लोगों की बातें उन्हें परेशान करती थीं, वही लोग अब उनकी सफलता की चर्चा करते हैं. करुणा ने मुश्किल समय में खुद को संभालने के साथ अपने बच्चे की जिम्मेदारी भी निभाई और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं.

आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश

करुणा की कहानी में सबसे बड़ा संदेश आत्मनिर्भरता और लगातार प्रयास करने का है. उनका मानना है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ा जा सकता है. पति की गुमशुदगी, बच्चे की जिम्मेदारी, आर्थिक संघर्ष, सामाजिक ताने और आंखों की बीमारी जैसी परेशानियों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी. सरकारी शिक्षक बनने के बाद उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो मुश्किल हालात में अपने सपनों को अधूरा छोड़ने का सोचते हैं.