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चीन में Gen Z को क्या हुआ? हजारों साल पुराने मंदिर की ओर क्यों भाग रहे, दुन‍ि‍या के सामने आई सच्चाई

चीन के युवा नौकरी और करियर की चिंता के बीच मंदिरों का रुख कर रहे हैं. शंघाई के प्राचीन लोंगहुआ मंदिर में अच्छी नौकरी, वेतन और सफलता की प्रार्थना हो रही है.

Gemini
Reepu Kumari

नई दिल्ली: चीन के युवा नौकरी और करियर को लेकर बढ़ती चिंता के बीच अब प्राचीन मंदिरों का रुख कर रहे हैं. शंघाई के करीब 1700 साल पुराने लोंगहुआ मंदिर में चीन के युवा अच्छी नौकरी, बेहतर वेतन और करियर में सफलता की कामना लेकर पहुंच रहे हैं. चीनी युवा रोजगार संकट के बीच अगरबत्ती जला रहे हैं, प्रार्थना कर रहे हैं और बौद्ध प्रतिमाओं के सामने अपनी इच्छाएं रख रहे हैं. रोजगार के सीमित अवसर, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और भविष्य की अनिश्चितता ने युवाओं की चिंता बढ़ाई है.

1700 साल पुराने मंदिर में बढ़ी युवाओं की भीड़

लोंगहुआ मंदिर चीन के पुराने और प्रसिद्ध बौद्ध मंदिरों में शामिल है. इन दिनों यहां धार्मिक आस्था के साथ-साथ नौकरी और करियर से जुड़ी उम्मीदें लेकर आने वाले युवाओं की संख्या भी चर्चा में है. युवा यहां अगरबत्ती जलाने, मंत्रों का जाप करने और प्रार्थना करने के अलावा लाल रिबन पर अपनी इच्छाएं भी लिख रहे हैं. किसी को नौकरी चाहिए तो कोई परीक्षा और करियर में सफलता की कामना कर रहा है.

नौकरी की तलाश बनी बड़ी चिंता

रिपोर्ट के अनुसार चीन में युवाओं के लिए नौकरी पाना आसान नहीं रह गया है. बड़े शहरों में अच्छी नौकरी के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और वेतन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से भी युवाओं की परेशानी बढ़ रही है. चीन में बेरोजगारी और रोजगार से जुड़ी अनिश्चितता के बीच कुछ युवा मानसिक राहत और उम्मीद के लिए आध्यात्मिक रास्ता अपना रहे हैं. मंदिर उनके लिए केवल पूजा की जगह नहीं, बल्कि मुश्किल समय में भरोसे का सहारा भी बन रहा है.


नौकरी मिलने के बाद भी भविष्य की चिंता

लोंगहुआ मंदिर पहुंचने वाली 26 वर्षीय कैसी कांग का उदाहरण भी इस स्थिति को समझाता है. उन्होंने रसायन व्यापार से जुड़ी कंपनी में नई नौकरी शुरू की है, लेकिन शुरुआती अवधि में नए ग्राहक तलाशने को लेकर चिंतित हैं. उनकी पिछली नौकरी में काम का बोझ बढ़ता गया, जबकि वेतन में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई. यही वजह है कि नई नौकरी मिलने के बावजूद उनके मन में भविष्य को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं है.

लाल रिबन पर लिख रहे करियर की इच्छाएं

मंदिर में आने वाले युवाओं की इच्छाओं में नौकरी में सफलता, करियर में आगे बढ़ना और आर्थिक स्थिरता प्रमुख हैं. छात्र भी परीक्षा में अच्छे परिणाम की कामना लेकर यहां पहुंच रहे हैं. 23 वर्षीय ली योंगछिंग पढ़ाई पूरी करने के करीब एक साल बाद काम शुरू करने के बाद मंदिर आने लगे. वह इंटरनेट पर सौंदर्य उत्पादों की सीधी बिक्री से जुड़े काम में सफलता की प्रार्थना करने पहुंचे. उनका कहना है कि इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है.

चीन में बदल रही युवाओं की सोच

चीन का रोजगार संकट केवल नौकरी नहीं मिलने तक सीमित नहीं है. नौकरी मिलने के बाद भी कई युवा काम का दबाव, कम वेतन और भविष्य की अनिश्चितता से परेशान हैं. ऐसे माहौल में प्राचीन परंपराओं की ओर लौटना युवाओं के लिए उम्मीद और मानसिक सहारे का माध्यम बन रहा है. लोंगहुआ मंदिर की तस्वीर बताती है कि आधुनिक अर्थव्यवस्था और बड़े शहरों में रहने के बावजूद युवा पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर कितनी चिंतित है.

भारत से भी मिलती-जुलती तस्वीर

भारत में भी युवा सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं. परीक्षा, साक्षात्कार और सीमित अवसरों के कारण करियर को लेकर दबाव बना रहता है. चीन में युवाओं का मंदिर पहुंचना इसी चिंता का एक अलग रूप दिखाता है. एक तरफ युवा बेहतर नौकरी के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग करियर सफलता के लिए आध्यात्मिक सहारे की ओर भी बढ़ रहे हैं.