अब नहीं चलेगी बुजुर्गों से बदसलूकी... UP में माता-पिता को मिला संतान को संपत्ति से हटाने का अधिकार

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है. अब देखभाल नहीं करने या दुर्व्यवहार करने वाली संतान को बुजुर्ग अपनी स्व अर्जित संपत्ति से बेदखल करा सकेंगे.

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Meenu Singh

उत्तर प्रदेश में बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार ने अहम कदम उठाया है. कैबिनेट ने वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है. इसके बाद देखभाल से मुंह मोड़ने या दुर्व्यवहार करने वाली संतान और आश्रित रिश्तेदारों को बुजुर्ग अपनी स्व अर्जित संपत्ति से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे. खास बात यह है कि शिकायत पर 30 दिन के भीतर सुनवाई का प्रावधान भी किया गया है.

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

प्रदेश सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में बदलाव किया है. नियम 22 में 22-क, 22-ख और 22-ग जोड़े जाएंगे. राज्य सप्तम विधि आयोग ने 2020 में इन संशोधनों की सिफारिश की थी. सरकार का मानना है कि इससे वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की बेहतर रक्षा हो सकेगी और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का कानूनी सहारा मिलेगा.

संपत्ति से बेदखली का रास्ता साफ


नए प्रावधानों के तहत यदि संतान या कोई आश्रित रिश्तेदार बुजुर्ग का भरण-पोषण नहीं करता या उसके साथ दुर्व्यवहार करता है, तो वरिष्ठ नागरिक अपनी स्व अर्जित संपत्ति से उसे बेदखल कराने की शिकायत कर सकेगा. इसके लिए जिला स्तरीय भरण-पोषण अधिकरण में आवेदन दिया जा सकेगा. अधिकरण मामले की सुनवाई के बाद बेदखली का आदेश जारी कर सकेगा.

30 दिन में होगी शिकायत पर सुनवाई

बुजुर्गों को न्याय के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए शिकायतों की सुनवाई 30 दिनों के भीतर पूरी करने का प्रावधान रखा गया है. यदि वरिष्ठ नागरिक खुद आवेदन नहीं कर सकता, तो उसकी ओर से कोई संस्था भी शिकायत दाखिल कर सकेगी. जिला स्तर पर ऐसे मामलों की निगरानी होगी और संबंधित अधिकारियों को इनकी रिपोर्ट नियमित रूप से सरकार को भेजनी होगी.

आदेश नहीं माना तो पुलिस करेगी मदद

अगर बेदखली का आदेश मिलने के 30 दिन बाद भी संबंधित व्यक्ति संपत्ति खाली नहीं करता, तो अधिकरण पुलिस की सहायता से आदेश लागू करा सकेगा. इसके बाद संपत्ति का कब्जा वरिष्ठ नागरिक को सौंपा जाएगा. पुलिस के लिए भी आदेश का पालन कराने में सहयोग करना जरूरी होगा. जिलाधिकारी को ऐसे मामलों की मासिक रिपोर्ट अगले महीने की सात तारीख तक सरकार को भेजनी होगी.

अपील की सुविधा और जल्द आएगा टोल फ्री नंबर

अधिकरण के फैसले के खिलाफ वरिष्ठ नागरिक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित अपीलीय अधिकरण में अपील कर सकेंगे. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार, पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध और स्पष्ट बनाया गया है. सरकार जल्द ही टोल फ्री नंबर भी जारी करेगी, जिससे उन बुजुर्गों को मदद मिल सकेगी जो खुद शिकायत दर्ज कराने के लिए कार्यालय तक नहीं पहुंच सकते.