कैंसर दवाओं की कालाबाजारी का भंडाफोड़, नकली इंजेक्शन में निकला पानी

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर की दवाओं की कालाबाजारी करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड किया है. जांच में पता चला की इस काले बाजारी में जो दवाइयां एक लाख की खरीदी जा रही है, उसमें केवल पानी था.

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Shanu Sharma

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 20 अगस्त को सात राज्यों में फैले नकली दवा बेचने वाली रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी की गई है. पुलिस ने 588 भरे एंटी-कैंसर वायल, 6 खाली वायल, 7 खाली दवा बॉक्स, दूसरी दवाओं की 3,021 यूनिट और करीब 50 लाख रुपये नकद जब्त किए. इनमें डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइवो, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी दवाएं शामिल हैं.

पुलिस के अनुसार, सिंडिकेट तक दवाएं तीन रास्तों से पहुंचती थीं. पहला, गैरकानूनी स्रोतों से नकली दवाओं की खरीद. दूसरा, अस्पतालों में मरीजों के लिए रखी दवाओं की हेराफेरी. तीसरा, सरकारी योजनाओं और गोदामों से सप्लाई की दवाओं को बाहर निकालना. राजस्थान सरकार की योजना के तहत कैंसर मरीजों को मुहैया कराई जाने वाली दवाएं भी कथित तौर पर इस नेटवर्क में शामिल थीं.

कैसे बेचते थे नकली दवा?

पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए  बताया कि गिरोह असली कार्टन और खाली बॉक्स संभालकर रखता था. बैच नंबर और एमआरपी एसीटोन जैसे रसायन से मिटाए जाते थे. इसके बाद थर्मोकोल, बबल रोल और पॉलीथीन से नई पैकिंग तैयार की जाती थी. पुलिस को लेनदेन के रजिस्टर और डायरी भी मिली हैं. गिरफ्तार लोगों में लक्ष्मी नगर के अभिषेक वैश्य, शुभम कुमार चौधरी और सूरज चौधरी शामिल हैं. अभिषेक के पास से 4 लाख और शुभम से 23 लाख रुपये मिले. नोएडा के आनंद कुमार से 337 वायल, फरीदाबाद के दीपक उर्फ रवि से 108 वायल व 6.5 लाख रुपये तथा गुरुग्राम के मयंक गर्ग से 55 वायल बरामद हुए. इनका पूरा नेटवर्क लगभग 7 राज्यों में फैला था, यहां मौजूद लोग पूरे सिस्टम को चलाते थे.


कैसे खुला राज?

इस बात की जानकारी पुलिस को 22 जून को मिली सूचना के बाद जांच शुरू हुई. 11 जुलाई को दिल्ली और नवी मुंबई में छापेमारी की गई. 12 जुलाई को एफआईआर दर्ज हुई. पुलिस अब पूरे सप्लाई चेन और भारतमार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए फैले नेटवर्क की जांच कर रही है. डॉ. मनीष शर्मा की गिरफ्तारी के बाद फोकस पूरे गिरोह पर है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में नकली दवाएं पहुंचने का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है.