मिसाइल और ड्रोन से दहला सऊदी, दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी पर हमले से मची हलचल
यमन की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं. जिजान की औद्योगिक सुविधा और अरामको से जुड़ी तेल स्थापना को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है.
नई दिल्ली: यमन और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है. यमन की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए हैं. इन हमलों में जिजान औद्योगिक शहर की एक महत्वपूर्ण औद्योगिक सुविधा और अरामको से जुड़ी तेल स्थापना को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है. हमलों के बाद कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जबकि यानबू प्रांत के लिए आपातकालीन अलर्ट जारी कर दिया गया. इस घटनाक्रम ने पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है.
जानकारी के अनुसार हमलों के दौरान जिजान औद्योगिक क्षेत्र में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं. यमन की ओर से मिसाइलों और ड्रोन का एक साथ इस्तेमाल किया गया. अरब मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अरामको से संबंधित तेल सुविधा भी हमले का लक्ष्य बनी. हालांकि नुकसान की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी का इंतजार है.
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कैसी है वहां की स्थिति?
हमलों के बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने यानबू प्रांत के लिए राष्ट्रीय प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के माध्यम से आपातकालीन अलर्ट जारी किया. जिजान, यानबू और दमाद के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की भी खबरें सामने आई हैं. सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव बना हुआ है. हाल ही में सऊदी अरब ने यमन के हूती नियंत्रित होदेइदा क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की थी. हूती समूह ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी थी कि इसका जवाब दिया जाएगा. हूती से जुड़े मीडिया के अनुसार होदेइदा में दूरसंचार सुविधाओं और कमरान द्वीप पर हमले हुए थे, जिनमें एक महिला घायल हुई थी.
हूती समूह ने क्या किया था दावा?
इससे पहले हूती समूह ने दावा किया था कि उसने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों को ड्रोन और मिसाइल से निशाना बनाया था. समूह का कहना था कि यह कार्रवाई 20 जुलाई को घोषित नाकेबंदी के तहत की गई और इसे सना हवाई अड्डे पर हुए हमले का जवाब बताया गया. सऊदी समर्थित सरकार ने उस हवाई अड्डे पर हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी ली थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 से चली आ रही अनौपचारिक शांति अब कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है. यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो लाल सागर के समुद्री व्यापार मार्ग और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर पड़ सकता है. दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल अरामको से जुड़ी सुविधाओं पर खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.