BRICS 2026: 140 सूत्रीय नई दिल्ली घोषणा-पत्र जारी, जानिए किस देश को क्या मिला और अमेरिका-पाक की क्यों बढ़ी चिंता
ब्रिक्स 2026 के 140 सूत्रीय घोषणा-पत्र में बहुपक्षवाद, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध प्रमुख रहा. जानिए भारत सहित अन्य देशों की प्रमुख उपलब्धियां और वैश्विक प्रभाव.
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 में 45 पन्नों का 140 सूत्रीय घोषणा-पत्र जारी किया गया. इस घोषणा-पत्र की सबसे प्रमुख बात 'बहुपक्षवाद' (Multilateralism) रही. सभी सदस्य देश इस बात पर सहमत नजर आए कि दुनिया में किसी एक देश की शक्ति या विचारधारा का दबदबा नहीं होना चाहिए. ब्रिक्स देशों ने व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर एक समावेशी, निष्पक्ष और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था स्थापित करने का संकल्प लिया.
नई दिल्ली घोषणा-पत्र के 140 सूत्रीय संकल्प
घोषणा-पत्र में वैश्विक सुरक्षा, अर्थशास्त्र और शांति को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आम सहमति बनी:
- सुरक्षा परिषद में सुधार: भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता दिए जाने के समर्थन को दोहराया गया.
- आतंकवाद पर कड़ा संदेश: आतंकवाद के सभी रूपों, सीमा-पार आतंकवाद की फंडिंग और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों की कड़े शब्दों में निंदा की गई. साथ ही, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की गई.
- एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध: अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करके लगाए जाने वाले एकतरफा दंडात्मक प्रतिबंधों और द्वितीयक प्रतिबंधों की निंदा की गई.
- वैश्विक संस्थानों में सुधार: डब्ल्यूटीओ (WTO), विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे वैश्विक संस्थानों में तत्काल सुधार और खुली अर्थव्यवस्था का आह्वान किया गया.
- अंतरिक्ष और ऊर्जा सुरक्षा: बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने और नवीकरणीय व परमाणु ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर बल दिया गया.
भारत, चीन, रूस और ईरान को क्या हासिल हुआ?
भारत: भारत को आतंकवाद के खिलाफ पूरे ब्रिक्स का मजबूत समर्थन मिला. सुरक्षा परिषद में स्थायी दावों को मजबूती मिली और चीन के साथ रिश्तों में सुधार व द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने का बड़ा मंच मिला.
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चीन: चीन अमेरिकी व्यापारिक दबाव, टैरिफ और एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ ब्रिक्स देशों को एकजुट करने में सफल रहा. भारत के साथ संबंधों में सकारात्मक पहल से चीन को अपनी वैश्विक छवि चमकाने का मौका मिला.
रूस: पश्चिमी देशों द्वारा अलग-थलग करने के प्रयासों के बावजूद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स के केंद्र में रहे. रूस के खिलाफ लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों पर भारत और यूएई जैसे देशों का भी समर्थन मिला.
ईरान व खाड़ी देश: ईरान को इजराइल के खिलाफ कड़ा रुख और ब्रिक्स में समानता का दर्जा मिला. वहीं, सऊदी अरब और यूएई ने ब्रिक्स मंच का उपयोग क्षेत्रीय तनाव प्रबंधन और बहुपक्षीय वार्ता के लिए किया.
अमेरिका, पाकिस्तान और इजराइल पर वैश्विक दबाव
अमेरिका: अमेरिका का सीधा नाम लिए बिना उसके द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंधों, डॉलर के वर्चस्व और टैरिफ नीतियों का विरोध करके ब्रिक्स ने साफ कर दिया कि एकतरफा वैश्विक व्यवस्था अब स्वीकार्य नहीं है.
पाकिस्तान: सीमा-पार आतंकवाद और टेरर फंडिंग पर ब्रिक्स के सख्त रुख ने पाकिस्तान की चिंताओं को बढ़ा दिया है, खासकर चीन की मौजूदगी में भारत के आतंकवाद-विरोधी प्रस्तावों के पास होने से.
इजराइल: गाजा और लेबनान के संदर्भ में इजराइल को सीधी चेतावनी और कब्जाधारी सेना वापस बुलाने की मांग से उस पर अंतरराष्ट्रीय संयम बरतने का दबाव बढ़ गया है.