BRICS 2026

ईरान पर हमले के लिए अमेरिका को जमीन न दें, पेजेशकियान ने खाड़ी देशों से की अपील

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने खाड़ी देशों से अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए अपनी जमीन इस्तेमाल नहीं करने देने की अपील की. उन्होंने सऊदी अरब और UAE को दुश्मन नहीं, भाई बताया.

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Ashutosh Rai

Masoud Pezeshkian : ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने खाड़ी और आसपास के देशों के साथ रिश्तों को लेकर अपना रुख साफ किया है. उन्होंने कहा कि ईरान की लड़ाई अरब देशों से नहीं, बल्कि क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी से है. साथ ही, उन्होंने पड़ोसी देशों से ईरान के खिलाफ किसी हमले में अमेरिका की मदद न करने की अपील की.

अमेरिका की मौजूदगी से है ईरान का विवाद

एक इंटरव्यू में पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान को UAE समेत अरब देशों से कोई दुश्मनी नहीं है. उनके मुताबिक, तेहरान की चिंता इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ताकत को लेकर है. उन्होंने साफ किया कि ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से रिश्ते और कारोबार हैं. इसी वजह से ईरान नहीं चाहता कि ये देश अमेरिका को ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपनी जमीन या दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराएं. उनका कहना है कि इलाके की सुरक्षा को आपसी दुश्मनी बढ़ाने के बजाय बातचीत और सहयोग से मजबूत किया जाना चाहिए.

UAE और अरब देशों को बताया भाई

पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान को UAE से कोई परेशानी नहीं है. उन्होंने अमीरात और क्षेत्र के दूसरे देशों को ईरान का भाई बताया. राष्ट्रपति के मुताबिक, इन देशों के साथ ईरान के पुराने संबंध हैं और व्यापार भी लंबे समय से जारी है. उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान अपने सभी पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है. उनका संदेश साफ था कि अरब देशों और ईरान को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने से किसी का फायदा नहीं होगा. क्षेत्र में रहने वाले देशों के बीच सहयोग बढ़ना ही ज्यादा बेहतर रास्ता है.


इलाके को गुटों में बांटने के खिलाफ ईरान

ईरानी राष्ट्रपति ने इस सोच को भी खारिज किया कि पश्चिम एशिया अलग-अलग और एक-दूसरे के विरोधी गुटों में बंटा रहे. उन्होंने कहा कि ईरान अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहता है. उनके मुताबिक, सऊदी अरब, UAE और दूसरे पड़ोसी देशों को दुश्मन मानने की नीति ईरान की नहीं है. पेजेश्कियान ने जोर दिया कि क्षेत्र के देशों के बीच पुराने रिश्तों और कारोबार को आगे बढ़ाया जाना चाहिए. साथ ही, किसी बाहरी ताकत को एक देश के खिलाफ दूसरे देश की जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए.