पाकिस्तान में आई इमरजेंसी की नौबत! शहबाज शरीफ ने बताई इसकी वजह
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लगाने के फैसले को सही ठहराया है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के फैसले का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में प्रांतीय सरकार के असहयोग के कारण केंद्र सरकार को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा. शहबाज शरीफ ने इस पूरे मामले के लिए विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI को जिम्मेदार ठहराया है.
शहबाज शरीफ के मुताबिक केंद्र सरकार ने स्थिति को बातचीत के जरिए सुलझाने की पूरी कोशिश की थी. उन्होंने दावा किया कि PTI के साथ लगातार 48 घंटे तक मैराथन बातचीत हुई और एक ड्राफ्ट भी तैयार किया गया था. इस प्रस्ताव के तहत PTI को अपना लॉन्ग मार्च वापस लेना था. हालांकि बातचीत के बावजूद विवाद का समाधान नहीं हो सका.
शहबाज शरीफ ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से कई बार समझौते और बातचीत के प्रयास किए गए, लेकिन इसके बदले उन्हें लगातार धमकियों और लंबे मार्च का सामना करना पड़ा. उन्होंने अपने भाई और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के कार्यकाल के दौरान डी-चौक पर हुए धरनों और पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों का भी जिक्र किया. शाहबाज शरीफ ने PTI के रवैये को बेहद गंभीर और भयानक बताया.
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खैबर पख्तूनख्वा में क्या हुआ?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर 2026 को संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल की घोषणा की. इसके बाद प्रांत की निर्वाचित सरकार को निलंबित कर गवर्नर शासन लागू कर दिया गया. इससे प्रशासनिक और राजनीतिक शक्तियां गवर्नर के हाथों में चली गईं.
इस फैसले के बाद PTI के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की बात सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी समेत कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, इंटरनेट बंद किए जाने और सड़कों पर सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
मानवाधिकार संगठन ने जताई आपत्ति
पाकिस्तान में उठाए गए इस कदम की मानवाधिकार संगठनों की ओर से भी आलोचना की गई है. इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में इसे सैन्य समर्थित सत्ता हथियाने की साजिश बताया है. संस्था ने सैनिकों की तैनाती, सोहेल अफरीदी की गिरफ्तारी और इंटरनेट बंद किए जाने की निंदा की है.
संगठन ने हिरासत में लिए गए सभी नेताओं को तत्काल रिहा करने और लोकतांत्रिक अधिकार बहाल करने की मांग की है. ऐसे में पाकिस्तान में केंद्र सरकार और PTI के बीच राजनीतिक टकराव अब और गहराता नजर आ रहा है. शाहबाज शरीफ सरकार इसे आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़ी मजबूरी बता रही है, जबकि विपक्ष और मानवाधिकार संगठन इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बता रहे हैं.